Monday, August 17, 2026

MMDR संशोधन बिल पर भाजपा का पलटवार, सांसदों ने कहा- झारखंड के हितों पर नहीं पड़ेगा प्रतिकूल असर.

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पलामू/हजारीबाग: खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां झामुमो और कांग्रेस सहित विपक्षी दल विधेयक के खिलाफ विरोध की बात कह रहे हैं, वहीं भाजपा सांसदों ने इसे लेकर राज्य सरकार के आरोपों को खारिज किया है। पलामू सांसद विष्णुदयाल राम और हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने दावा किया कि प्रस्तावित बदलाव से झारखंड को आर्थिक नुकसान नहीं होगा।

विष्णुदयाल राम बोले- संसद में मजबूती से बात रखनी चाहिए थी

पलामू में पत्रकारों से बातचीत के दौरान विष्णुदयाल राम ने कहा कि MMDR संशोधन विधेयक पर संसद में पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने झारखंड के विपक्षी सांसदों से सवाल किया कि विधेयक पर बहस के दौरान उन्होंने राज्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से क्यों नहीं उठाया।

भाजपा सांसद ने कहा कि खनिज संसाधनों के मुद्दे को केवल केंद्र और राज्य के बीच टकराव के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, खनिज संपदा का उपयोग व्यापक राष्ट्रीय हित और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

खनिज ब्लॉक की नीलामी और उत्पादन का मुद्दा उठाया

विष्णुदयाल राम ने झारखंड में खनिज ब्लॉकों की नीलामी और उनके संचालन का आंकड़ा सामने रखते हुए कहा कि राज्य में पिछले 11 वर्षों में 11 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, लेकिन इनमें से कोई भी अब तक उत्पादन शुरू नहीं कर सका है।

उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 79 ब्लॉकों की नीलामी हुई और 35 ब्लॉक संचालन में आ चुके हैं। उन्होंने राज्य में खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

सांसद ने सरकार को सुझाव दिया कि नीलाम किए गए ब्लॉकों को समयबद्ध तरीके से शुरू किया जाए, नई खदानों की पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नीलामी हो और खनन प्रभावित इलाकों में डीएमएफ फंड का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए।

मनीष जायसवाल ने राज्य सरकार पर साधा निशाना

हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने भी MMDR संशोधन विधेयक को लेकर राज्य सरकार के विरोध पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि विधेयक से झारखंड को नुकसान होने की बात सही नहीं है।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के आंदोलन से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए खनिज विधेयक को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार को विधेयक के प्रावधानों को लेकर लोगों के सामने तथ्य रखना चाहिए।

रॉयल्टी व्यवस्था को लेकर भाजपा का तर्क

भाजपा सांसद ने कहा कि खनिजों से संबंधित रॉयल्टी व्यवस्था को एक समान नियमों के तहत संचालित करने का प्रावधान राज्यों के बीच समानता सुनिश्चित करने की दिशा में देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे देश की संघीय व्यवस्था के संदर्भ में उचित बताया।

मनीष जायसवाल ने राज्य सरकार के उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें खनिज से जुड़े बदलावों का असर मंईयां सम्मान योजना और अन्य विकास योजनाओं पर पड़ने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं पर सीधे तौर पर कोई ऐसा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

फिलहाल MMDR संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड में सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। राज्य सरकार जहां इसके आर्थिक प्रभाव को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा सांसद इसे राज्य के लिए नुकसानरहित बताते हुए सरकार की आपत्तियों को राजनीतिक करार दे रहे हैं।

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