Thursday, August 20, 2026

JSSC-CGL चयनित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी, नियुक्ति रद्द करने के फैसले के खिलाफ प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना.

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रांची: झारखंड में JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार के पास धरना देकर अपनी नियुक्तियां रद्द किए जाने के सरकारी फैसले का विरोध किया। प्रदर्शन के कारण सचिवालय परिसर की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

अभ्यर्थियों ने सरकार से नियुक्ति रद्द करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने और उन्हें सेवा में बनाए रखने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने बेहद गंभीर और चिंताजनक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। प्रशासन की ओर से उन्हें निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर जाने की सलाह दी गई, लेकिन अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर ही अपनी मांग रखने पर अड़े रहे।

नियुक्ति रद्द होने से नाराज हैं चयनित अभ्यर्थी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने लंबी चयन प्रक्रिया और परीक्षा के बाद नौकरी हासिल की थी। चयन के बाद उन्हें नियुक्ति पत्र भी दिए गए और वे कई महीनों तक सरकारी सेवा में कार्यरत रहे। अब नियुक्ति समाप्त किए जाने के फैसले से उनके सामने नौकरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, कई लोगों ने नौकरी मिलने के बाद अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी थीं। अचानक सेवा समाप्त होने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दोबारा परीक्षा के विकल्प पर भी आपत्ति

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा जाता है तो यह सभी के लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं होगा। कई चयनित उम्मीदवारों की उम्र अब निर्धारित आयु सीमा के करीब पहुंच चुकी है या वे आयु सीमा पार कर चुके हैं।

उनका तर्क है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने, नियुक्ति मिलने और लंबे समय तक काम करने के बाद अब दोबारा परीक्षा की स्थिति बनना उनके लिए गंभीर समस्या है।

JSSC-CGL परीक्षा का पूरा विवाद क्या है?

JSSC-CGL की पहली परीक्षा जनवरी 2024 में आयोजित की गई थी। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर शिकायतें और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।

दूसरी परीक्षा के परिणाम और चयन प्रक्रिया को लेकर भी विवाद सामने आया और मामला न्यायालय तक पहुंचा। चयनित अभ्यर्थियों के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया के बाद नियुक्ति की दिशा में आगे बढ़ा गया और 31 दिसंबर 2025 को चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति के बाद उन्होंने लगभग सात महीने तक सरकारी विभागों में काम किया। अब सरकार के नियुक्ति रद्द करने के फैसले ने उनके भविष्य को लेकर असमंजस पैदा कर दिया है।

धरना स्थल बदलने के प्रशासन के सुझाव को ठुकराया

प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शहर के निर्धारित धरना स्थल पर जाकर आंदोलन करने की अपील की। हालांकि, अभ्यर्थियों ने इसे स्वीकार नहीं किया।

उनका कहना है कि उनकी मांग सीधे सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचनी चाहिए, इसलिए वे प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार के पास ही प्रदर्शन करना चाहते हैं।

सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

प्रदर्शनकारी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति समाप्त करने के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया से जुड़े विवादों का असर उन उम्मीदवारों पर नहीं डाला जाना चाहिए, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति प्राप्त की।

अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांग पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, पूरे मामले में सरकार और संबंधित भर्ती आयोग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

संपादकीय नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों को आधार बनाकर स्वतंत्र भाषा और नई संरचना में तैयार की गई है। मूल समाचार के वाक्य, पैराग्राफ और फोटो-कैप्शन की नकल नहीं की गई है। प्रदर्शन के संवेदनशील पहलू को भी बिना विवरण दिए जिम्मेदारी से प्रस्तुत किया गया है।

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