Friday, July 17, 2026

JSDMS में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल, न्यायिक जांच की मांग.

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रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (JSDMS) में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुला पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने मामले की न्यायिक जांच, स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

फर्जी बैंक गारंटी मामले का किया उल्लेख

मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने के आरोप में छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया था। उनका दावा है कि बाद में इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से हटाकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने इस निर्णय की प्रक्रिया और इसके पीछे अपनाए गए नियमों पर सवाल उठाए हैं।

भुगतान प्रक्रिया पर मांगा जवाब

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि संबंधित कंपनियों पर पहले से अनियमितताओं के आरोप थे, तो उन्हें दोबारा सरकारी भुगतान की अनुमति किस आधार पर दी गई। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि इस निर्णय के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार था और अब तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

सात प्रमुख मांगें रखीं

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से कई बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है। इनमें शामिल हैं—

  • पूरे मामले की न्यायिक या स्वतंत्र जांच।
  • संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई।
  • वर्ष 2023-24 से अब तक JSDMS के वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों का विशेष ऑडिट।
  • जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार पदों से हटाना।
  • कथित रूप से किए गए भुगतान की वैधता की जांच और आवश्यक होने पर राशि की वसूली।
  • जांच पूरी होने तक संबंधित कंपनियों को नए सरकारी कार्य या भुगतान से रोकना।
  • भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से संबंधित अधिकारियों की भूमिका और संपत्तियों की जांच कराना।

सरकार से पारदर्शी जांच की अपील

पत्र में मरांडी ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि जिन कंपनियों पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, उन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की।

नोट: यह समाचार नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों पर आधारित है। इन आरोपों पर संबंधित सरकारी विभाग या अन्य पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई है।

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