रांची: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और छात्र संगठनों के बीच रविवार को तीसरे दौर की बातचीत होगी। शनिवार को स्टेट गेस्ट हाउस में विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सरकार के चार मंत्रियों ने अलग-अलग बैठक की। छात्रों की मांगों और सुझावों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अवगत कराने के बाद सरकार ने रविवार को दोबारा वार्ता का फैसला लिया है।
रविवार को दोपहर 12 बजे स्टेट गेस्ट हाउस में छात्र प्रतिनिधियों के साथ फिर बैठक प्रस्तावित है। सरकार की ओर से कहा गया है कि छात्रों की मांगों पर बिंदुवार चर्चा की जाएगी और सरकार की आगे की रणनीति भी स्पष्ट की जाएगी। बैठक के परिणाम के बाद ही इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय सामने आने की उम्मीद है।
करीब साढ़े तीन घंटे चली छात्र संगठनों से बातचीत
शनिवार को मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा ने अलग-अलग छात्र संगठनों से बातचीत की। वार्ता में देवेंद्र महतो के नेतृत्व वाले छात्र समूह के अलावा NSUI, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बातचीत में 14वीं JPSC परीक्षा, बैकलॉग परीक्षाओं, JSSC CGL और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठाये गये। इसके बाद मंत्रियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी लंबी बैठक की और छात्र संगठनों की मांगों की जानकारी दी।
14वीं JPSC समेत बैकलॉग परीक्षाओं का मुद्दा प्रमुख
छात्र संगठनों की ओर से 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की मांग प्रमुखता से रखी गयी है। इसके अलावा वर्ष 2023 और 2025 से जुड़ी सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षाओं को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाये हैं।
संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच जल्द पूरी करने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और आगे होने वाली परीक्षाओं के लिए स्पष्ट कैलेंडर जारी करने की मांग की है।
देवेंद्र महतो गुट ने आंदोलन जारी रखने की बात कही
देवेंद्र महतो गुट के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में किसी अंतिम सहमति पर पहुंचना संभव नहीं हुआ। छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी मुख्य मांग, विशेष रूप से 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने का निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस समूह की ओर से 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम को भी जारी रखने की बात कही गयी है। हालांकि बैठक के बाद दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताया।
NSUI ने जांच पूरी करने के लिए 90 दिन की मांग रखी
NSUI के प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और लंबित जांच को लेकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं। संगठन ने 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने के साथ परीक्षा प्रक्रिया में सामने आयी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि CID जांच को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए और दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही आगामी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी करने की मांग भी रखी गयी।
JCM ने पांच सूत्रीय मांगों पर दिया जोर
झारखंड छात्र मोर्चा ने भी सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें 14वीं JPSC परीक्षा और संबंधित बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने, पारदर्शी तरीके से नया परीक्षा कैलेंडर तैयार करने और लंबित परीक्षाओं को समय पर आयोजित करने की मांग शामिल है।
मोर्चा की ओर से परिणाम जारी करने और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात भी कही गयी।
आदिवासी छात्र संघ ने JSSC CGL पर उठाये सवाल
आदिवासी छात्र संघ ने JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। संगठन ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ ही तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों में जनजातीय भाषाओं को उचित प्राथमिकता देने तथा झारखंड के स्थानीय युवाओं के हितों को ध्यान में रखकर भर्ती प्रक्रिया तैयार करने की मांग रखी गयी।
सरकार ने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की
बैठक के बाद सरकार की ओर से छात्र संगठनों से आंदोलन समाप्त कर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की गयी। सरकार ने छात्रों, अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों से सुझाव लेने के लिए एक ई-मेल माध्यम भी उपलब्ध कराया है।
मंत्रियों का कहना है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और बातचीत, जांच तथा परीक्षा व्यवस्था में सुधार के माध्यम से समाधान तलाशने का प्रयास किया जा रहा है।
आज की बैठक पर टिकी निगाहें
शनिवार की बातचीत के बाद अब रविवार की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अलग-अलग छात्र संगठनों की मांगों में कई मुद्दे समान हैं, जिनमें परीक्षा रद्द करने, जांच जल्द पूरी कराने, परीक्षा कैलेंडर नियमित करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग प्रमुख है।
सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि सभी पक्षों की बात सुनने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में रविवार की वार्ता के बाद आंदोलन को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
