Thursday, November 5, 2026

Jharkhand SIR: झारखंड में 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम पर संशय, प्रदीप यादव ने उठाए गंभीर सवाल

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रांची, 5 नवंबर 2026: झारखंड में विधानसभा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं और इसके जरिए बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित करने की आशंका है।

उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 1 करोड़ 7 लाख मतदाताओं के नाम को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। इस मामले में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

गुरुवार को रांची स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि CBI, ED और RBI जैसी संस्थाओं के बाद अब निर्वाचन व्यवस्था को भी प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

यादव के अनुसार, जब सरकार को जनता का समर्थन कम होने का एहसास हुआ तो वोट चोरी के अलग-अलग तरीके अपनाए गए। राहुल गांधी ने समय-समय पर इन मुद्दों को उठाया, जिसके बाद SIR को हथियार बनाया गया।

निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

प्रदीप यादव ने वर्ष 2023 में चुनाव आयोग से जुड़े बदलावों का उल्लेख करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के 2 मार्च 2023 के अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले का हवाला दिया।

उनका कहना था कि अदालत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की समिति की व्यवस्था दी थी। इसका उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और राजनीतिक प्रभाव को कम करना था।

1.07 करोड़ मतदाताओं को लेकर क्या है दावा?

प्रदीप यादव ने झारखंड में जारी मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया को बिना उचित योजना और नियमों के पालन के संचालित किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 2,64,63,236 थी।

उनके मुताबिक, इनमें से करीब 44 लाख मतदाताओं को ASDD श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा लगभग 63 लाख मतदाता अलग-अलग श्रेणियों में शामिल हैं। इनमें करीब 45 लाख लॉजिकल एनोमली, 15 लाख नो मैपिंग और तीन लाख अन्य श्रेणियों में हैं।

इस तरह कुल मिलाकर करीब 1.07 करोड़ मतदाताओं के सामने अपने मताधिकार को सुरक्षित रखने की चुनौती होने का उन्होंने दावा किया।

जीवित मतदाताओं को ASDD सूची में डालने का आरोप

प्रदीप यादव ने कहा कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने भरोसा दिलाया था कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। इसके बावजूद उनके विधानसभा क्षेत्र के कई ऐसे मतदाताओं के नाम ASDD सूची में शामिल कर दिए गए हैं, जो अब भी संबंधित मतदान केंद्रों पर मौजूद हैं।

उन्होंने दावा किया कि कई मतदाताओं ने इनेमरेशन फॉर्म जमा किया, इसके बाद भी उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं हुए।

Form-7 के दुरुपयोग का भी लगाया आरोप

कांग्रेस नेता ने Form-7 के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि इस फॉर्म के माध्यम से राजनीतिक विरोधियों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में गलत तरीके से Form-7 जमा करने के मामले में भाजपा नेताओं के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। इनमें गोड्डा मुफ्फसिल थाना में FIR संख्या 0154, दिनांक 3 सितंबर 2026 और दुमका के सरैयाहाट थाना में केस संख्या 112/2026, दिनांक 25 सितंबर 2026 शामिल हैं।

19 मतदाताओं के नाम का विवरण साझा किया

प्रदीप यादव ने ऐसे 19 मतदाताओं का विवरण भी साझा किया, जिनके नाम कथित तौर पर ASDD सूची में शामिल किए गए हैं। इनमें सरिता देवी, सलामत शेख, ईकरामुत शेख, मो. समीर शेख, नेमत खातून, युसूफ शेख, सहीदा आलम, झगरू राय, नंदलाल राय, दुर्योधन राय और प्यारी देवी समेत अन्य लोग शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में एक जीवित मतदाता को मृत घोषित कर दिया गया है।

नियम 21 के तहत नाम दोबारा जोड़ने की मांग

प्रदीप यादव ने निर्वाचन व्यवस्था से मांग की कि ASDD श्रेणी में निर्वाचन तंत्र की गलती या लापरवाही के कारण हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम निर्वाचक निबंधन नियमावली, 1960 के नियम 21 के तहत दोबारा मतदाता सूची में दर्ज किए जाएं। इसके लिए ऐसे मतदाताओं से Form-6 भरवाने की बाध्यता नहीं रखी जानी चाहिए।

राहुल गांधी की बहस की चुनौती स्वीकार करने की मांग

प्रदीप यादव ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को राहुल गांधी की बहस की चुनौती स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था पर भरोसा है तो उसे इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा जरूरी है।

संवाददाता सम्मेलन में शहजादा अनवर, राकेश सिन्हा, लाल किशोरनाथ शाहदेव, डॉ. एम. तौसीफ और अख्तर अली उपस्थित थे।

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