स्पोर्ट्स डेस्क: इंडियन सुपर लीग (ISL) में वित्तीय चुनौतियां अब क्लबों की टीम निर्माण रणनीति पर भी असर डाल रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रसारण और प्रायोजन से होने वाली आय में कमी के चलते कई क्लबों ने अपने खर्चों में कटौती शुरू कर दी है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव खिलाड़ियों के वेतन पर देखने को मिला है।
बताया जा रहा है कि जमशेदपुर एफसी सहित अधिकांश ISL क्लबों ने भारतीय खिलाड़ियों के वेतन ढांचे में बदलाव किया है। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक पश्चिम बंगाल के कुछ प्रमुख क्लबों ने फिलहाल अपने मौजूदा वेतन ढांचे में बड़े बदलाव नहीं किए हैं।
शीर्ष खिलाड़ियों की सैलरी में आई कमी
रिपोर्टों के अनुसार, जिन भारतीय फुटबॉलरों को पहले सालाना ₹70 लाख से ₹1.5 करोड़ तक का वेतन मिलता था, अब कई मामलों में यह घटकर ₹20 लाख से ₹70 लाख के बीच रह गया है। यह बदलाव क्लबों द्वारा लागत कम करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
क्यों बढ़ा आर्थिक दबाव?
फुटबॉल से जुड़े जानकारों का कहना है कि लीग में केंद्रीय प्रायोजन (Central Sponsorship) और प्रसारण अधिकारों से मिलने वाले राजस्व में कमी के कारण क्लबों के सामने वित्तीय संतुलन बनाए रखना चुनौती बन गया है।
कई क्लबों के कुल बजट का बड़ा हिस्सा खिलाड़ियों के वेतन पर खर्च होता था। मौजूदा परिस्थितियों में इस खर्च को बनाए रखना कठिन होने के कारण क्लबों को बजट में कटौती और अनुबंधों की नई समीक्षा करनी पड़ी।
विदेशी खिलाड़ियों की भर्ती में भी बदली रणनीति
बजट सीमित होने का असर विदेशी खिलाड़ियों की भर्ती पर भी दिखाई दे रहा है। अब क्लब महंगे विदेशी खिलाड़ियों के बजाय कम लागत में बेहतर प्रदर्शन करने वाले फुटबॉलरों की तलाश पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रांसफर मार्केट में अब “वैल्यू फॉर मनी” खिलाड़ियों की मांग बढ़ेगी, जिससे क्लब सीमित संसाधनों में प्रतिस्पर्धी टीम तैयार कर सकें।
जमशेदपुर FC की रणनीति पर भी असर
रिपोर्टों के मुताबिक, रांची में आयोजित डूरंड कप के लिए जमशेदपुर एफसी ने भी अपेक्षाकृत कम बजट वाले खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने की रणनीति अपनाई है। इसे क्लब की वित्तीय योजना के अनुरूप उठाया गया कदम माना जा रहा है।
बंगाल के क्लब फिलहाल अलग राह पर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बदलाव के बीच पश्चिम बंगाल के कुछ बड़े फुटबॉल क्लब अभी तक खिलाड़ियों के वेतन में व्यापक कटौती से बचते नजर आए हैं। हालांकि भविष्य में उनकी रणनीति क्या होगी, इस पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
भारतीय फुटबॉल पर क्या होगा असर?
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां भारतीय फुटबॉल के लिए एक परिवर्तनकारी दौर साबित हो सकती हैं। अल्पकाल में खिलाड़ियों और क्लबों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यदि क्लब वित्तीय अनुशासन और टिकाऊ मॉडल अपनाते हैं, तो लंबे समय में इससे लीग की आर्थिक स्थिरता मजबूत हो सकती है।
हालांकि, वेतन कटौती और क्लबों की नई भर्ती नीति को लेकर संबंधित क्लबों या लीग की ओर से आधिकारिक बयान आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
