अगर पिछले कुछ महीनों में आपके फोन पर कोई ऐसा मैसेज आया है, जिसमें लिखा हो कि आपका कोई पार्सल रुका हुआ है या आपका बैंक अकाउंट खतरे में है या फिर आपका टोल टैक्स बकाया है, तो समझ जाएं कि वो मैसेज किसी आम स्पैमर के द्वारा नहीं, बल्कि चीन के एक बेहद शातिर और संगठित क्राइम नेटवर्क का हिस्सा हो सकता था.
दरअसल, 12 जून 2026 को गूगल ने न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में “Outsider Enterprise” नाम के एक चाइनीज़ साइबर गिरोह के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर किया है. यह पहला मौका है जब गूगल ने किसी ऐसे ग्रुप पर कानूनी कार्रवाई की है जिसने गूगल के ही एआई टूल Gemini का गलत इस्तेमाल करके लोगों को ठगा है.
गूगल की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस साइबर गिरोह ने जो तरीका अपनाया, वो काफी शातिर था. ये लोग टेलीग्राम के जरिए “phishing kits” यानी नकली वेबसाइट बनाने के रेडीमेड टूल दूसरे अपराधियों को बेचते थे. इस काम के लिए उन्होंने Gemini AI से HTML कोड लिखवाया और उसे अपने फिशिंग प्लेटफॉर्म में डालकर गूगल, यूट्यूब, अमेरिका की पोस्टल सर्विस USPS और E-ZPass जैसे भरोसेमंद ब्रांड्स की हू-ब-हू नकली वेबसाइट तैयार कर लीं.
जेमिनी का इस्तेमाल करके नकली वेबसाइट्स
इनकी सबसे बड़ी ताकत यही थी कि ये लोग जेमिनी की मदद से बिना किसी टेक्निकल इंफोर्मेशन के भी मिनटों में एक प्रोफेशनल दिखने वाली नकली वेबसाइट बना लेते थे, जिसे देखने के बाद आम लोगों को पता ही नहीं चल पा रहा था कि वो वेबसाइट असली है या नकली. गूगल ने इसे “phishing-for-dummies” यानी शुरुआती लोगों के लिए ठगी का हथियार कहा है. इस सॉफ्टवेयर की सब्सक्रिप्शन फीस मात्र 88 डॉलर प्रति हफ्ता यानी करीब 7,300 रुपये थी, जिसमें 290 से ज्यादा रेडीमेड टेम्पलेट्स मिलते थे.
गूगल की शिकायत में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो काफी हैरान करने वाले हैं. नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच में ही यानी करीब पांच महीनों में गूगल ने इस गिरोह से जुड़े 15.9 लाख से ज्यादा फर्ज़ी URLs पकड़े. मई 2026 में सिर्फ दो हफ्तों के भीतर एंड्रॉयड यूज़र्स ने 55,000 स्पैम टेक्स्ट मैसेज रिपोर्ट किए यानी हर मिनट में दो से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं. इसी दो हफ्ते के दौरान चीन के इस साइबर क्रिमिनल ग्रुप ने 25 लाख मैसेज भेजे जिनमें नकली वेबसाइट्स के लिंक थे.
कुल मिलाकर इस नेटवर्क ने 9,000 से ज्यादा नकली वेबसाइट और 10 लाख से ज्यादा फर्जी URLs बनाए. अमेरिकन सुरक्षा एजेंसी FBI के मुताबिक, जुलाई 2023 से लेकर अभी तक में इस ग्रुप ने करीब 38.7 लाख क्रेडिट कार्ड की जानकारी चुराई और 1.9 अरब डॉलर यानी करीब 15,800 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है.

चीन का यह गिरोह पूरी तरह से संगठित था और इसके अलग-अलग विभाग थे. एक टीम नकली वेबसाइट के टेम्प्लेट बनाती थी. दूसरी टीम सोशल मीडिया, पुराने डेटा ब्रीच और पब्लिक रिकॉर्ड से पीड़ितों यूज़र्स की लिस्ट बनाती थी. तीसरा ग्रुप “स्मार्टफोन बैंक्स” यानी SIM कार्ड और मोडेम से भरे डिवाइसेज़ से बल्क में स्पैम टेक्स्ट भेजता था और चौथा ग्रुप चोरी किए गए क्रेडिट कार्ड का पैसा निकालकर उसे लॉन्डर करता था. ये सबकुछ टेलीग्राम पर खुलेआम होता था, जहां इनके ट्यूटोरियल वीडियो, टिप्स और नए अटैक्स की प्लानिंग तक मिलती थी.
गूगल का जवाब और कानूनी कार्रवाई
गूगल ने इस मामले में सिर्फ मुकदमा ही दायर नहीं किया है, बल्कि कंपनी ने एफबीआई के साथ मिलकर इस नेटवर्क के इंफ्रास्ट्रक्चर को तोड़ने का काम भी शुरू कर दिया है. AT&T, T-Mobile और Verizon जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर इन नकली मैसेज को यूजर्स तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक करने का काम चल रहा है. इसके अलावा गूगल ने Shopify पर मौजूद गिरोह के अकाउंट और स्टोरफ्रंट भी बंद करवाए हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एफबीआई के साइबर डिविज़न के असिस्टेंट डायरेक्टर ब्रेट लेथरमेन ने कहा कि अपराधी एआई का इस्तेमाल करके फ्रॉड को इतना असली बना रहे हैं कि उसे पकड़ना काफी मुश्किल हो जाता है. गूगल अकेले इस लड़ाई को नहीं लड़ रहा. कंपनी अमेरिकी संसद में 7 bipartisan bills को समर्थन दे रही है जो AI से जुड़े स्कैम के खिलाफ कानून को मजबूत करने के लिए बनाए जा रहे हैं.
गौरतलब है कि यह गूगल का पहला केस नहीं है. नवंबर 2025 में भी गूगल ने “Lighthouse” नाम के एक अन्य फिशिंग सर्विस प्लेटफॉर्म के खिलाफ RICO केस किया था, जो मुकदमा दायर होते ही कुछ घंटों में बंद हो गया था.
इस पूरे मामले से सबसे बड़ी बात यह समझ आती है कि एआई ने बड़े-बड़े क्राइम को भी काफी आसान बना दिया है. अब डिजिटल वर्ल्ड पर बड़े स्तर पर फ्रॉड करने के लिए टेक्निकल वर्ल्ड में जीनियस होना जरूरी नहीं है, क्योंकि एआई सबकुछ कर सकता है. एक आम इंसान भी एआई की मदद से मिनटों में हजारों नकली वेबसाइट्स बना सकता है और करोड़ों लोगों को आसानी से ठग सकता है. दूसरी तरफ पीड़ित लोगों के लिए ये समझ पाना काफी मुश्किल हो गया है कि फोन या कंप्यूटर पर दिखने वाली कौनसी चीज असली है.
गूगल के अनुसार एंड्रॉयड में एआई-पावर्ड स्कैम डिटेक्शन पहले से मौजूद है और हर महीने 10 अरब से ज्यादा खतरनाक मैसेज को फिल्टर करता है. हालांकि, जब तक कानून एआई युग के इन खतरों के हिसाब से नहीं बदलता. ऐसे गिरोह नए रूपों में सामने आते रहेंगे.


