Monday, October 12, 2026

Dhanbad News: चार-पांच महीने से 108 एंबुलेंस कर्मियों को वेतन नहीं, जर्जर गाड़ियों के भरोसे मरीजों की जान.

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धनबाद, झारखंड | 12 अक्टूबर 2026: झारखंड के धनबाद जिले में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों ने बकाया वेतन, बर्खास्त कर्मियों की बहाली और एंबुलेंस की खराब हालत को लेकर नाराजगी जताई है। सोमवार को भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने धनबाद सिविल सर्जन कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले चार से पांच महीने से वेतन नहीं मिला है, जबकि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली कई एंबुलेंस की स्थिति भी बेहद खराब है।

चार-पांच महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप

प्रदर्शन में शामिल 108 एंबुलेंस पायलट दिनेश कुमार यादव ने बताया कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में दिन-रात मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है।

कर्मचारियों ने कंपनी और संबंधित अधिकारियों पर लापरवाही तथा मनमानी का आरोप लगाते हुए बकाया वेतन का जल्द भुगतान करने की मांग की। उनका कहना है कि वेतन में लगातार देरी से रोजमर्रा के खर्चों और परिवार के भरण-पोषण में मुश्किलें बढ़ रही हैं।

20 कर्मचारियों को हटाने का मामला भी उठा

प्रदर्शन के दौरान संघ ने 20 कर्मचारियों को काम से हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। संघ का आरोप है कि कंपनी की कार्यप्रणाली और कथित शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया।

संघ के मुताबिक, इस मामले को लेकर श्रम विभाग और स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक भी हुई थी। संगठन का दावा है कि बैठक में बर्खास्त कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उनकी बहाली नहीं हुई है।

कर्मचारियों ने मांग की कि हटाए गए सभी 20 कर्मियों को जल्द काम पर वापस लिया जाए। हालांकि, इस मामले में कंपनी या संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

धनबाद की 37 एंबुलेंस में केवल चार-पांच के चलने का दावा

प्रदर्शनकारियों ने जिले में 108 एंबुलेंस सेवा के वाहनों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। कर्मचारियों के अनुसार, धनबाद में कुल 37 एंबुलेंस हैं, लेकिन इनमें से केवल चार-पांच गाड़ियां ही किसी तरह चल पा रही हैं।

कर्मचारियों ने दावा किया कि चल रही गाड़ियों की हालत भी संतोषजनक नहीं है। कई एंबुलेंस के टायर घिस चुके हैं, कुछ में स्टेपनी और ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ वाहनों की बॉडी भी खराब हो चुकी है।

यदि ये दावे सही हैं, तो ऐसी स्थिति आपातकालीन चिकित्सा सेवा की उपलब्धता और मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, जिले में कुल कितनी एंबुलेंस परिचालन योग्य हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।

मरीजों की सुरक्षा और आपातकालीन सेवा पर चिंता

108 एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता और अस्पताल तक पहुंच उपलब्ध कराना है। ऐसे में वाहनों की खराब हालत और जरूरी उपकरणों की कथित कमी मरीजों के साथ-साथ एंबुलेंस कर्मचारियों के लिए भी चुनौती बन सकती है।

कर्मचारियों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद ईएमटी और पायलट लगातार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एंबुलेंस की नियमित मरम्मत नहीं होगी और जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, तो आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर सेवा कैसे सुनिश्चित की जा सकेगी।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने प्रशासन और संबंधित कंपनी के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • चार-पांच महीने से लंबित वेतन का जल्द भुगतान।
  • काम से हटाए गए 20 कर्मचारियों की बहाली।
  • खराब एंबुलेंस की मरम्मत और नियमित रखरखाव।
  • सभी वाहनों में जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • मरीजों को सुरक्षित और समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा में सुधार।

समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने बकाया वेतन के भुगतान, बर्खास्त कर्मियों की बहाली और एंबुलेंस की स्थिति सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कंपनी, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कर्मचारियों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल, वेतन भुगतान और एंबुलेंस की वास्तविक परिचालन स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

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