हेल्थ डेस्क: डिमेंशिया ऐसी स्थिति है जिसमें याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, व्यवहार और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद कई मामलों में बीमारी की पहचान काफी देर से होती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि शुरुआती बदलावों को परिवार और आसपास के लोग उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा समझ लेते हैं।
अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम कारण माना जाता है। इसमें समय के साथ मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और याददाश्त समेत कई मानसिक क्षमताओं में गिरावट आ सकती है। उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया के मामलों की संख्या भी बढ़ती है।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
कभी-कभार किसी का नाम भूल जाना या कोई छोटी बात याद न रहना उम्र के साथ सामान्य हो सकता है। चिंता तब ज्यादा होती है, जब भूलने की समस्या लगातार बनी रहे और व्यक्ति की सामान्य दिनचर्या प्रभावित होने लगे।
कुछ ऐसे बदलाव हैं जिन पर परिवार को ध्यान देना चाहिए, जैसे हाल में हुई बातचीत या घटनाओं को बार-बार भूलना, परिचित जगहों पर रास्ता पहचानने में परेशानी होना, पैसों या दवाइयों से जुड़े कामों में लगातार दिक्कत आना या व्यवहार में स्पष्ट बदलाव दिखाई देना।
इन संकेतों को केवल उम्र का असर मानकर लंबे समय तक टालने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
जागरूकता की कमी भी है बड़ी वजह
डिमेंशिया को लेकर जानकारी की कमी बीमारी की पहचान में देरी का एक कारण बन सकती है। कुछ परिवारों में इसे उम्र बढ़ने की स्वाभाविक प्रक्रिया मान लिया जाता है। वहीं सामाजिक संकोच या बीमारी को लेकर गलत धारणाएं भी लोगों को चिकित्सा सलाह लेने से रोक सकती हैं।
कई बार परिवार तब डॉक्टर के पास पहुंचता है, जब याददाश्त या व्यवहार में बदलाव व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर परेशानी पैदा करने लगता है। इससे समय रहते स्थिति का मूल्यांकन कराने का अवसर कम हो सकता है।
विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच भी चुनौती
डिमेंशिया की जांच और देखभाल के लिए न्यूरोलॉजिस्ट, जेरियाट्रिशियन, मनोचिकित्सक या विशेष मेमोरी क्लीनिक की जरूरत पड़ सकती है। बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में ऐसी विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता सीमित हो सकती है।
दूरी, इलाज का खर्च, विशेषज्ञ से मिलने के लिए लंबा इंतजार और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी जैसी समस्याएं भी समय पर जांच में बाधा बन सकती हैं।
डिमेंशिया की पहचान जल्दी होना क्यों जरूरी?
याददाश्त या व्यवहार में बदलाव के पीछे केवल डिमेंशिया ही कारण नहीं होता। इसलिए लगातार लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। जांच के दौरान डॉक्टर अन्य संभावित और इलाज योग्य कारणों को भी देख सकते हैं।
यदि डिमेंशिया की पुष्टि होती है, तो शुरुआती चरण में बीमारी और उसकी प्रगति को समझने, उपलब्ध उपचार विकल्पों पर चर्चा करने, देखभाल की योजना बनाने और परिवार को भविष्य के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
जागरूकता और परिवार की भूमिका अहम
डिमेंशिया की पहचान में सुधार के लिए स्थानीय भाषाओं में जागरूकता अभियान, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षण और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ के पास रेफर करने की बेहतर व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है। टेलीमेडिसिन और आउटरीच सेवाएं भी दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ सलाह की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
परिवार के स्तर पर सबसे जरूरी बात है कि लगातार बने रहने वाले बदलावों को नजरअंदाज न किया जाए। यदि याददाश्त, व्यवहार या रोजमर्रा के काम करने की क्षमता में लगातार गिरावट दिख रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
डिमेंशिया के बारे में खुलकर बातचीत और समय पर चिकित्सकीय सलाह बीमारी से जुड़े भ्रम और सामाजिक संकोच को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही इससे मरीज और उसके परिवार को उपलब्ध देखभाल और सहायता के बारे में सही जानकारी मिल सकती है।
