26 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
नई दिल्ली: फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दिखने वाले आकर्षक शॉपिंग विज्ञापन आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। मुंबई में एक निजी अस्पताल में काम करने वाली नर्स को फेसबुक पर 299 रुपये की ड्रेस का विज्ञापन देखने के बाद कथित तौर पर करीब एक लाख रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद एक परिवार के खाते से लगभग 98,000 रुपये की रकम निकलने का मामला सामने आया है।
त्योहारी खरीदारी के दौरान ऑनलाइन ठगी के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने उपभोक्ताओं को फर्जी विज्ञापनों और संदिग्ध लिंक से सावधान रहने की सलाह दी है। साइबर धोखाधड़ी का संदेह होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करने या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
सोशल मीडिया पर फर्जी शॉपिंग विज्ञापनों से सावधान
साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए कई बार नामी ब्रांड के लोगो, उत्पादों की तस्वीरों और भारी छूट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे विज्ञापन देखने में असली लग सकते हैं, लेकिन उन पर क्लिक करने के बाद उपभोक्ता को फर्जी वेबसाइट पर पहुंचाया जा सकता है।
इन वेबसाइटों का डिजाइन वास्तविक ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म जैसा हो सकता है। इसके बाद ठग एडवांस भुगतान, बैंकिंग जानकारी या अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मांग सकते हैं।
कभी-कभी सीमित समय में ऑफर खत्म होने का दबाव बनाकर लोगों को जल्दबाजी में भुगतान करने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आकर्षक ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
₹299 की ड्रेस खरीदने के चक्कर में कैसे गंवाए एक लाख रुपये?
मुंबई में एक निजी अस्पताल में काम करने वाली नर्स ने अप्रैल में फेसबुक पर 299 रुपये में ड्रेस देने वाला विज्ञापन देखा। ड्रेस खरीदने की कोशिश में शुरुआत में लेनदेन सामान्य लगा, लेकिन भुगतान करने के बाद उससे अलग-अलग बहानों से और पैसे मांगे जाने लगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, नर्स से शिपिंग शुल्क, जीपीएस शुल्क, ट्रैकिंग फीस, वेरिफिकेशन कोड और पता सत्यापन के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी गई। उसे भरोसा दिलाया गया कि ज्यादातर अतिरिक्त पैसे वापस कर दिए जाएंगे और ड्रेस भी पहुंचा दी जाएगी।
इन आश्वासनों पर विश्वास करके नर्स ने 16 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच पांच दिनों तक भुगतान किया। जब उसे ठगी का एहसास हुआ, तब तक कथित तौर पर उसका कुल नुकसान करीब एक लाख रुपये हो चुका था।
यह घटना बताती है कि छोटी रकम के ऑफर से शुरू होने वाली धोखाधड़ी में बार-बार भुगतान मांगकर बड़ी रकम ऐंठी जा सकती है।
Instagram पर विज्ञापन क्लिक करने के बाद ग्वालियर के परिवार को 98 हजार का नुकसान
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी सोशल मीडिया विज्ञापन से जुड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, 11 अगस्त को रचना बाथम अपने मोबाइल फोन पर इंस्टाग्राम चला रही थीं। इसी दौरान एक विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उनका फोन हैंग हो गया और काम करना बंद कर दिया।
परिवार मोबाइल को पास की एक रिपेयरिंग दुकान पर ले गया, जहां उसे दोबारा चालू किया गया। उसी रात रचना के पति को बैंक से खाते में रकम कम होने का नोटिफिकेशन मिला।
बैंक से पूछताछ करने पर पता चला कि खाते से तीन अनधिकृत UPI लेनदेन के जरिए लगभग 98,000 रुपये निकाल लिए गए थे।
हालांकि, केवल फोन हैंग होने और उसके बाद हुए लेनदेन के आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि विज्ञापन पर क्लिक करने से ही रकम निकाली गई। मामले में ठगी के तरीके और तकनीकी कारणों की पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
ऑनलाइन शॉपिंग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
I4C की सलाह के अनुसार, सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऑफर पर भुगतान करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है। सुरक्षित खरीदारी के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करें: किसी विज्ञापन में दिए गए लिंक पर सीधे भरोसा करने के बजाय ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप पर जाकर ऑफर जांचें।
- असामान्य छूट से सतर्क रहें: बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर उत्पाद मिलने का दावा हो तो विक्रेता और ऑफर की विश्वसनीयता जांचें।
- अपरिचित वेबसाइट पर एडवांस भुगतान न करें: वेबसाइट की पहचान और विक्रेता की जानकारी स्पष्ट न होने पर भुगतान करने से बचें।
- अतिरिक्त शुल्क मांगने पर रुकें: शिपिंग, वेरिफिकेशन या अन्य अस्पष्ट कारणों से बार-बार पैसे मांगे जाएं तो भुगतान रोक दें।
- संदिग्ध लिंक से बचें: सोशल मीडिया पोस्ट, विज्ञापन और अनजान संदेशों में मिले लिंक को खोलने से पहले उनकी जांच करें।
- बैंकिंग अलर्ट पर ध्यान दें: खाते से जुड़ा कोई संदिग्ध संदेश मिलने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें और लेनदेन की जानकारी जांचें।
साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आपके साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हुई है, तो समय गंवाए बिना ये कदम उठाएं:
- 1930 पर कॉल करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत जल्द दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
- बैंक को तुरंत सूचित करें: अपने बैंक या संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता को संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दें।
- सबूत सुरक्षित रखें: भुगतान की रसीद, बैंक मैसेज, स्क्रीनशॉट, वेबसाइट का पता और संदिग्ध व्यक्ति के संदेश संभालकर रखें।
- फोन और खातों की सुरक्षा जांचें: संदिग्ध गतिविधि के बाद बैंकिंग ऐप, ईमेल और अन्य जरूरी खातों की सुरक्षा जांचें। जरूरत पड़ने पर बैंक की सहायता से संबंधित सुरक्षा उपाय करें।
समय पर शिकायत करने से संबंधित संस्थाओं को लेनदेन पर कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है, हालांकि रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
साइबर ठगी से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी
रिपोर्ट में दिए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर वर्ष 2024 में वित्तीय साइबर अपराध की कम से कम 19.19 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 24.03 लाख बताई गई।
आंकड़ों के अनुसार, साइबर धोखाधड़ी से वर्ष 2024 में करीब 22,848 करोड़ रुपये और वर्ष 2025 में लगभग 22,495 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
ये आंकड़े ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के पैमाने को दर्शाते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर खरीदारी करते समय सावधानी बरतना, भुगतान से पहले विक्रेता की जांच करना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दिखने वाला हर शॉपिंग विज्ञापन भरोसेमंद नहीं होता। कम कीमत, भारी छूट और तुरंत भुगतान करने का दबाव किसी फर्जी ऑफर का हिस्सा हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जानकारी की पुष्टि करें और अनजान विक्रेताओं को बार-बार भुगतान करने से बचें।
याद रखें: साइबर ठगी का संदेह होते ही 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
