Tuesday, October 27, 2026

वैगई एक्सप्रेस ने 5 घंटे 35 मिनट में तय किए 430 KM, जानें कैसे दूर की देरी.

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26 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

मदुरै, तमिलनाडु: दक्षिणी रेलवे की प्रमुख ट्रेनों में शामिल वैगई सुपरफास्ट एक्सप्रेस ने अपनी रफ्तार और परिचालन तालमेल से शानदार प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन ने चेंगलपट्टू से मदुरै के बीच लगभग 430 किलोमीटर की दूरी 5 घंटे 35 मिनट में तय की। इस दौरान ट्रेन की अधिकतम अनुमत गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

चेन्नई एग्मोर से मदुरै जाने वाली ट्रेन संख्या 12635 शुरुआत में निर्धारित समय से पीछे चल रही थी। रास्ते में रखरखाव कार्य के कारण भी ट्रेन को रुकना पड़ा। इसके बावजूद ट्रेन संचालन दल और कंट्रोल रूम के बीच बेहतर समन्वय से आगे की यात्रा के दौरान देरी की भरपाई की गई।

शुरुआत में 30 से 40 मिनट तक हुई देरी

वैगई सुपरफास्ट एक्सप्रेस 24 अक्टूबर को चेन्नई एग्मोर से दोपहर 1:25 बजे रवाना हुई। यह अपने निर्धारित समय से करीब 10 मिनट देर से चली।

इसके बाद कोडंबक्कम के पास ट्रैक और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य के कारण ट्रेन को लगभग 20 मिनट तक रुकना पड़ा। रास्ते के कुछ अन्य परिचालन कारणों से भी देरी हुई और कुल विलंब करीब 40 मिनट तक पहुंच गया।

हालांकि, आगे के स्टेशनों पर ट्रेन के संचालन और रूट क्लीयरेंस के बेहतर प्रबंधन से इस देरी को कम करने में मदद मिली।

चेंगलपट्टू से विलुप्पुरम तक 103 KM का सफर 64 मिनट में

ट्रेन यात्री अरुण पांडियन के अनुसार, वैगई एक्सप्रेस दोपहर करीब 2:25 बजे तांबरम पहुंची और 2:30 बजे वहां से रवाना हुई। इसके बाद ट्रेन लगभग 2:58 बजे चेंगलपट्टू पहुंच गई।

चेंगलपट्टू से विलुप्पुरम तक करीब 103 किलोमीटर की दूरी ट्रेन ने 64 मिनट में तय की। इस दौरान ट्रेन की गति और परिचालन व्यवस्था को उल्लेखनीय बताया गया।

विलुप्पुरम स्टेशन पर ट्रेन के चालक दल में बदलाव किया गया। इसके बाद मदुरै डिवीजन के संचालन दल ने आगे की यात्रा की जिम्मेदारी संभाली।

ज्यादातर सफर में 110 KM प्रति घंटे की रफ्तार

रिपोर्ट के मुताबिक, मदुरै के पास निर्माण कार्य वाले एक हिस्से को छोड़कर ट्रेन ने यात्रा के बड़े हिस्से में 110 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम अनुमत गति बनाए रखी।

रेलवे ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारियों के समन्वय और स्टेशनों पर रूट क्लीयरेंस मिलने से ट्रेन को आगे बढ़ने में मदद मिली। इससे शुरुआती देरी के बावजूद यात्रा के अगले हिस्से में अतिरिक्त विलंब नहीं हुआ।

हालांकि, किसी ट्रेन की वास्तविक गति अलग-अलग हिस्सों में ट्रैक की स्थिति, सिग्नल, निर्माण कार्य और परिचालन प्रतिबंधों पर निर्भर करती है।

रात 8:37 बजे मदुरै पहुंची वैगई एक्सप्रेस

वैगई सुपरफास्ट एक्सप्रेस रात 8:37 बजे मदुरै रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर पहुंची। यात्री अरुण पांडियन के मुताबिक, चेंगलपट्टू से मदुरै तक लगभग 430 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेन को 5 घंटे 35 मिनट लगे। इस हिस्से में नौ स्टॉप शामिल थे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि ट्रेन को सीधे प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर लाया जाता, तो उसके और जल्दी पहुंचने की संभावना थी।

ट्रेन के इस प्रदर्शन को बेहतर परिचालन समन्वय के उदाहरण के रूप में देखा गया। हालांकि, वैगई एक्सप्रेस और वंदे भारत ट्रेनों की गति की तुलना करते समय उनके निर्धारित समय, ठहराव, मार्ग और परिचालन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

लोको पायलट से कंट्रोल रूम तक, सामूहिक प्रयास का नतीजा

वैगई एक्सप्रेस के प्रदर्शन में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, कंट्रोल रूम के अधिकारियों और अन्य रेलवे कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

रेलवे परिचालन अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के रवाना होने में हुई देरी की भरपाई के लिए निर्धारित गति बनाए रखने के साथ-साथ रूट क्लीयरेंस का प्रभावी प्रबंधन भी जरूरी होता है।

इस मामले में चेंगलपट्टू से मदुरै तक के स्टेशनों पर ट्रेन के संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए समन्वय किया गया। इससे ट्रेन को आगे की यात्रा के दौरान अतिरिक्त देरी से बचाने में मदद मिली।

2019 में लगाए गए थे आधुनिक LHB कोच

दक्षिणी रेलवे ने 30 जून 2019 को वैगई और पल्लवन एक्सप्रेस में आधुनिक LHB यानी लिंक हॉफमैन बुश कोच शामिल किए थे।

ये कोच आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन कोचों का वजन पारंपरिक कोचों की तुलना में कम होता है, जिससे ट्रेन के संचालन में कुछ लाभ मिल सकते हैं।

इससे पहले इस तरह के कोच शताब्दी और तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भी इस्तेमाल किए जाते थे। वैगई और पल्लवन एक्सप्रेस में इन्हें शामिल करना नियमित रेल सेवाओं में यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम था।

पहले भी समय से पहले पहुंचने का रिकॉर्ड बना चुकी है ट्रेन

वैगई एक्सप्रेस इससे पहले भी निर्धारित समय से पहले गंतव्य तक पहुंचने को लेकर चर्चा में रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, 3 मार्च 2022 को मदुरै से चेन्नई जाने वाली वैगई एक्सप्रेस तकनीकी समस्या के कारण सुबह 7:05 बजे के बजाय 7:26 बजे रवाना हुई थी। इसके बावजूद ट्रेन दोपहर 2:07 बजे चेन्नई पहुंच गई, जबकि उसका सामान्य आगमन समय दोपहर 2:30 बजे बताया गया था।

इसके अलावा, 15 अक्टूबर 2022 को भी ट्रेन के तेज प्रदर्शन का उल्लेख किया गया था।

क्या वंदे भारत के बराबर है वैगई एक्सप्रेस की रफ्तार?

वैगई सुपरफास्ट एक्सप्रेस की अधिकतम अनुमत गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। ट्रेन ने कुछ हिस्सों में इसी गति से सफर करते हुए शुरुआती देरी की भरपाई की।

लेकिन केवल किसी एक यात्रा के समय के आधार पर वैगई एक्सप्रेस को वंदे भारत के बराबर तेज घोषित करना सही नहीं होगा। दोनों ट्रेनों की तुलना के लिए संबंधित मार्गों की गति सीमा, स्टॉपेज, निर्धारित यात्रा समय और वास्तविक परिचालन आंकड़ों का अध्ययन जरूरी है।

फिर भी, वैगई एक्सप्रेस की यह यात्रा दिखाती है कि रेलवे कर्मचारियों के बेहतर समन्वय और रूट क्लीयरेंस के प्रभावी प्रबंधन से परिचालन देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

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