बोकारो: झारखंड की औद्योगिक पहचान रखने वाला बोकारो अब आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिले में केरलम की तर्ज पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त हेल्थ कॉटेज विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य आयुर्वेदिक उपचार, योग और वेलनेस सेवाओं को एक ही परिसर में उपलब्ध कराना है, ताकि राज्य के लोगों के साथ देश-विदेश से आने वाले लोगों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
पेटरवार क्षेत्र में जमीन की तलाश
परियोजना के लिए रांची-बोकारो मार्ग पर पेटरवार के आसपास करीब 2 एकड़ जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया चल रही है। भविष्य में जरूरत के मुताबिक भूमि का विस्तार भी किया जा सकता है। प्रस्तावित हेल्थ कॉटेज को शहर की भीड़, प्रदूषण और शोर से दूर प्राकृतिक वातावरण में विकसित करने की योजना है।
ऐसे वातावरण में मरीजों को उपचार के साथ आराम और मानसिक शांति का माहौल उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा।
पंचकर्म और आयुर्वेदिक थेरेपी की सुविधा
परियोजना को केंद्रीय आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीपीपी मॉडल पर विकसित किए जाने की योजना है। इसमें सरकारी सहयोग के साथ निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा।
हेल्थ कॉटेज में अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सकों और पंचकर्म विशेषज्ञों की देखरेख में विभिन्न आयुर्वेदिक उपचार और थेरेपी उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें तनाव प्रबंधन, पंचकर्म, वेलनेस और लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं के लिए आयुर्वेद आधारित उपचार शामिल होंगे।
योग, ध्यान और जैविक भोजन भी
प्रस्तावित केंद्र में उपचार के साथ वेलनेस गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। यहां योगशाला, ध्यान केंद्र और सात्विक एवं जैविक भोजन जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले लोगों के अलावा विदेशी पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों को ध्यान में रखते हुए आवास तथा बहुभाषी सहायता की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
मेडिकल टूरिज्म को मिल सकता है बढ़ावा
हेल्थ कॉटेज के जरिए बोकारो को आयुर्वेद आधारित वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म के एक संभावित केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश है। इससे झारखंड के लोगों को आयुर्वेदिक उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़ सकता है।
परियोजना के आकार लेने पर स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। आयुर्वेदिक थेरेपी, योग प्रशिक्षण, हॉस्पिटैलिटी, सुरक्षा और अन्य सेवाओं में काम के अवसर बन सकते हैं। इसके साथ औषधीय पौधों की खेती और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
