Monday, September 21, 2026

Bihar Bullet Train: बिहार से गुजरेगा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, दिल्ली-पटना सफर 4 घंटे 41 मिनट का अनुमान.

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पटना: बिहार में बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी की योजना अब राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का हिस्सा बनने जा रही है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के बजट में दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। प्रस्तावित नेटवर्क बिहार को उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से जोड़ेगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जून 2026 में बिहार में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि दिल्ली से लखनऊ-वाराणसी होते हुए पटना और सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। इसके चालू होने पर दिल्ली से पटना की यात्रा करीब 4 घंटे 41 मिनट में पूरी होने का अनुमान है।

बिहार के किन इलाकों से गुजरने की चर्चा?

प्रस्तावित कॉरिडोर का बिहार वाला हिस्सा अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। हालांकि विभिन्न रिपोर्टों में बक्सर, आरा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज जैसे शहरों को संभावित मार्ग से जोड़कर बताया गया है।

संभावित रूट को इस तरह समझा जा सकता है:

बक्सर → आरा → पटना → बेगूसराय → खगड़िया → कटिहार → पूर्णिया → किशनगंज

लेकिन इन शहरों में स्टेशन बनना या पूरा रूट इसी क्रम में तय होना अभी अंतिम निर्णय नहीं है। हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में अंतिम अलाइनमेंट DPR, तकनीकी अध्ययन, आर्थिक व्यवहार्यता और अन्य मंजूरियों के बाद तय किया जाता है। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि नए HSR कॉरिडोर की स्वीकृति इन प्रक्रियाओं के नतीजों और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

पटना से दिल्ली पहुंचने में कितना समय लगेगा?

रेल मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक दिल्ली-पटना हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग 4 घंटे 41 मिनट हो सकता है। वहीं, सरकार ने वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कनेक्शन के लिए वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच करीब 2 घंटे 55 मिनट का अनुमान दिया है।

इसका मतलब है कि बिहार के लिए यह परियोजना पूर्वी भारत में तेज रेल कनेक्टिविटी का एक महत्वपूर्ण प्रस्तावित हिस्सा होगी।

ट्रेन की रफ्तार कितनी होगी?

हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को बहुत अधिक गति से संचालन के लिए डिजाइन किया जाता है। तुलना के तौर पर मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को 320 किमी प्रति घंटे तक की परिचालन गति के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की अंतिम परिचालन गति परियोजना के तकनीकी डिजाइन में तय होगी।

स्टेशन कहां बनेंगे, अभी अंतिम फैसला नहीं

बिहार में प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल के लिए किन-किन स्थानों पर स्टेशन बनाए जाएंगे, इसकी अंतिम सूची अभी सामने नहीं आई है। पटना के आसपास भी अलग-अलग स्थानों के नाम चर्चा में हैं, लेकिन उन्हें अंतिम स्टेशन मानना फिलहाल सही नहीं होगा।

परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट और सर्वे के बाद स्टेशन की जगह, ट्रैक का अलाइनमेंट और भूमि अधिग्रहण से जुड़े फैसले स्पष्ट होंगे।

1550 किलोमीटर के कॉरिडोर का दावा कितना सही?

प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी नेटवर्क को लेकर अलग-अलग स्तर पर लंबाई के अनुमान सामने आए हैं। आधिकारिक बजट दस्तावेज फिलहाल इसे दो जुड़े हुए हाई-स्पीड कॉरिडोर—दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी—के रूप में प्रस्तुत करता है। सरकार ने सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर बताई है।

इसलिए करीब 1,550 किलोमीटर की लंबाई को फिलहाल अंतिम परियोजना लंबाई के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।

बिहार को क्या होगा फायदा?

हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से बिहार के प्रमुख शहरों को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बड़े शहरी केंद्रों से तेज कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है। इससे लंबी दूरी की यात्री आवाजाही के साथ व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने इन कॉरिडोर को ‘ग्रोथ कनेक्टर’ के रूप में विकसित करने की योजना बताई है। सात प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए करीब 4,000 किलोमीटर का नेटवर्क और लगभग 16 लाख करोड़ रुपये तक के संभावित निवेश का अनुमान दिया गया है।

अभी किस चरण में है परियोजना?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परियोजना अभी प्रस्ताव और योजना के चरण में है। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी देने से पहले DPR, तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता, वित्तीय संसाधन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इसलिए बिहार में स्टेशन, अंतिम रूट और निर्माण की समयसीमा से जुड़ी जानकारी आगे की परियोजना प्रक्रिया के बाद ही निश्चित होगी।

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