नई दिल्ली: विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR) जमा में आने वाले सप्ताहों में वृद्धि होने की संभावना है, लेकिन यह बाजार की शुरुआती उम्मीदों से कम रह सकती है। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी बार्कलेज रिसर्च की ताजा रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और आयातकों की मजबूत डॉलर मांग निकट भविष्य में रुपये पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
FCNR जमा की रफ्तार उम्मीद से धीमी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में बैंकों के साथ बैठक कर FCNR जमा योजना की प्रगति की समीक्षा की। बैंकों का मानना है कि आने वाले समय में जमा राशि बढ़ सकती है, लेकिन बार्कलेज का अनुमान है कि कुल पूंजी प्रवाह बाजार की ऊंची अपेक्षाओं तक नहीं पहुंच पाएगा।
पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी योजना
जून की शुरुआत में केंद्र सरकार और RBI ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से कई कदम उठाए थे। इनमें FCNR (B) जमा योजना भी शामिल थी, जिसके तहत अनिवासी भारतीय विदेशी मुद्रा में भारतीय बैंकों में सावधि जमा कर सकते हैं।
इन उपायों के बाद बाजार में अनुमान लगाया गया था कि FCNR जमा के जरिए 50 अरब डॉलर तक की राशि आ सकती है, जबकि कुछ विशेषज्ञों ने यह आंकड़ा 70 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई थी। उस समय इस घोषणा से रुपये को भी मजबूती मिली थी।
रुपये पर फिर बढ़ा दबाव
बार्कलेज का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी और आयातकों द्वारा डॉलर की बढ़ती खरीद के कारण रुपये पर दबाव फिर बढ़ गया है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि आने वाले समय में रुपये में धीरे-धीरे कमजोरी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि RBI के हालिया कदमों से रुपये पर अत्यधिक दबाव पड़ने की आशंका कम हुई है और इससे भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को समर्थन मिल सकता है।
सितंबर तक तेज वृद्धि की जरूरत
रिपोर्ट के मुताबिक FCNR योजना की समयसीमा सितंबर के अंत तक है। यदि इस अवधि में बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप पूंजी जुटानी है, तो आने वाले महीनों में जमा राशि में काफी तेज वृद्धि दर्ज करनी होगी।
2013 की योजना से तुलना उचित नहीं
बार्कलेज ने यह भी कहा कि मौजूदा FCNR योजना की तुलना वर्ष 2013 की योजना से करना पूरी तरह उचित नहीं होगा। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में मौजूदा समय में ब्याज दरें पहले की तुलना में अधिक हैं, जिसके कारण अनिवासी भारतीयों के लिए FCNR जमा का आकर्षण अपेक्षाकृत कम हो सकता है।
विदेशी निवेश पर सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पोर्टफोलियो निवेश के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। भारतीय सरकारी बॉन्ड के वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों, जैसे FTSE World Government Bond Index और Bloomberg Global Aggregate Index, में शामिल होने की संभावना से भविष्य में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है।
इसके बावजूद रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि आयातकों की डॉलर मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, जिसके चलते पूंजी प्रवाह बढ़ने के बावजूद रुपये पर दबाव पूरी तरह समाप्त होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।


