नई दिल्ली: भगवान जगन्नाथ पर आधारित एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज पर ओडिशा हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश फिल्म की निर्धारित रिलीज से ठीक एक दिन पहले आया, जिसके बाद निर्माता पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
फिल्म 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बाद इसकी रिलीज फिलहाल टाल दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देबदत्त कामत ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। हालांकि, उसी दिन सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की गई, लेकिन अदालत ने अगले दिन मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताई।
अब सुप्रीम कोर्ट 17 जुलाई को ओडिशा हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगा।
हाई कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
बताया जा रहा है कि ओडिशा हाई कोर्ट में फिल्म के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश जारी किया गया। याचिका में दावा किया गया कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ से जुड़े कुछ प्रसंग पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और स्कंद पुराण में वर्णित विवरणों के अनुरूप नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आशंका जताई कि फिल्म के कुछ दृश्य श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
निर्माता पक्ष ने क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में निर्माता पक्ष ने तर्क दिया कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से विधिवत प्रमाणन मिल चुका है और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत प्रदर्शन की अनुमति दी गई है।
याचिका में यह भी कहा गया कि फिल्म की रिलीज रोकने से निर्माताओं और निवेशकों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। उनके अनुसार, देशभर में 300 से अधिक सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं।
अदालत की टिप्पणी
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसका प्रयोग इस प्रकार नहीं होना चाहिए जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों या सामाजिक तनाव उत्पन्न होने की आशंका बने।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि यदि संबंधित धार्मिक प्राधिकारियों, जिनमें गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन द्वारा सुझाए गए बदलावों को शामिल किए बिना फिल्म को रथ यात्रा के दौरान प्रदर्शित किया जाता है, तो इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।
अब इस मामले में अंतिम राहत मिलेगी या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।


