Thursday, July 16, 2026

झारखंड कल्याण सेवा के अधिकारियों के लिए नई प्रशिक्षण नीति लागू, AI और ई-गवर्नेंस पर रहेगा विशेष जोर.

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रांची: झारखंड सरकार ने कल्याण सेवा के अधिकारियों की कार्यक्षमता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से नई प्रशिक्षण नीति लागू की है। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब अधिकारियों के लिए सेवा के विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। इस पहल का मकसद उन्हें आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रशासन और बदलती प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।

तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण

नई व्यवस्था के तहत अधिकारियों को तीन अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहला प्रशिक्षण नियुक्ति के तुरंत बाद, दूसरा सेवाकाल के दौरान और तीसरा पदोन्नति मिलने के बाद आयोजित किया जाएगा।

नियुक्ति के बाद आठ सप्ताह का प्रशिक्षण

नए अधिकारियों के लिए कुल आठ सप्ताह का आधारभूत प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। इसकी शुरुआत एक सप्ताह के परिचयात्मक सत्र से होगी, जिसमें विभाग की कार्यप्रणाली, विभिन्न योजनाओं, संगठनात्मक ढांचे तथा कंप्यूटर संचालन के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रारंभिक जानकारी दी जाएगी।

इसके बाद पांच सप्ताह का जिला स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण होगा। इस अवधि में अधिकारी जिला कल्याण पदाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे। उन्हें योजनाओं के क्रियान्वयन, निरीक्षण और भौतिक सत्यापन जैसी गतिविधियों का भी अनुभव मिलेगा।

प्रदर्शन का होगा मूल्यांकन

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। यदि किसी अधिकारी का प्रदर्शन निर्धारित मानकों से कम पाया जाता है, तो उसे अतिरिक्त दो सप्ताह का प्रशिक्षण दोबारा पूरा करना होगा।

संस्थागत प्रशिक्षण में प्रशासनिक कौशल पर जोर

अंतिम चरण में दो सप्ताह का संस्थागत प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसमें कार्यालय प्रबंधन, ई-गवर्नेंस, नेतृत्व विकास, सरकारी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सेवाकाल और पदोन्नति के बाद भी होगा प्रशिक्षण

नई नीति के तहत अधिकारियों को हर 6 से 8 वर्ष के अंतराल पर दो सप्ताह का रिफ्रेशर प्रशिक्षण लेना होगा। इस दौरान मानव संसाधन प्रबंधन, ई-ऑफिस प्रणाली, समस्या समाधान, विवाद प्रबंधन और प्रशासनिक नवाचार जैसे विषयों पर उन्हें अपडेट किया जाएगा।

इसके अलावा पदोन्नति के बाद 3 से 5 दिन का विशेष प्रशिक्षण भी अनिवार्य होगा। इसमें नई जिम्मेदारियों के निर्वहन, नेतृत्व क्षमता, तनाव प्रबंधन, नैतिक प्रशासन और सुशासन से जुड़े पहलुओं पर विशेष फोकस रहेगा।

90 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य

विभाग ने सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कम से कम 90 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की है। विभागीय मंत्री की मंजूरी के बाद लागू की गई इस नई नीति का उद्देश्य कल्याण सेवा के अधिकारियों को आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था, डिजिटल तकनीकों और प्रभावी जनसेवा के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना है।

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