गिरिडीह: पारसनाथ पर्वत की तराई में स्थित मधुबन पंचायत के कई गांवों और टोलों की वर्षों पुरानी सड़क समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन ने क्षेत्र में दो नई पीसीसी सड़कों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को उपायुक्त (डीसी) रामनिवास यादव स्वयं दलुआडीह गांव पहुंचे और ग्रामीणों को परियोजना की स्वीकृति संबंधी दस्तावेज सौंपे। इस घोषणा के बाद स्थानीय लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
गांव पहुंचकर डीसी ने की ग्रामीणों से बातचीत
उपायुक्त रामनिवास यादव, प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोज मरांडी और अंचल अधिकारी के साथ पैदल दलुआडीह पहुंचे। गांव में पेड़ की छांव के नीचे आयोजित बैठक में उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने सड़क निर्माण परियोजनाओं की मंजूरी की जानकारी दी।
डीसी ने बताया कि मधुबन पंचायत के कई टोलों में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। मरीजों को अस्पताल तक खाट पर ले जाने जैसी घटनाओं ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया था। इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर सड़क निर्माण की योजना तैयार की गई और अब उसे प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है।
दो सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी
स्वीकृत योजनाओं के तहत पहली सड़क पिपराडीह से दलुआडीह तक बनाई जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 88.62 लाख रुपये है और इसमें एक पुलिया का निर्माण भी शामिल होगा।
दूसरी परियोजना कोठटांड़ से वन्यजीव क्षेत्र (वाइल्ड लाइफ सीमा) तक पीसीसी सड़क निर्माण की है, जिसकी लागत करीब 39.57 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
दोनों परियोजनाओं पर कुल मिलाकर लगभग 1.28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनका क्रियान्वयन एनईआरपी (NERP) के माध्यम से किया जाएगा। प्रशासन के अनुसार, जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
लंबे समय से बनी हुई थी सड़क की समस्या
मधुबन पंचायत के उत्तरी पारसनाथ क्षेत्र के कई गांव अब तक सड़क सुविधा से वंचित रहे हैं। ग्रामीणों को दैनिक आवागमन के लिए पथरीले और दुर्गम रास्तों का सहारा लेना पड़ता है। विशेष रूप से बीमार और बुजुर्ग लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भारी कठिनाई होती रही है। हाल के महीनों में मरीजों को खाट पर ले जाने की घटनाएं सामने आने के बाद इस मुद्दे ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और जिला प्रशासन की पहल के बाद अब सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि परियोजना पूरी होने के बाद आवागमन आसान होगा और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक उनकी पहुंच पहले से बेहतर हो सकेगी।


