Thursday, July 2, 2026

झारखंड हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों के पेंशन मामले में फैसला सुनाते हुए सरकार से सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

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रांची: झारखंड के हजारों पारा शिक्षकों के लिए झारखंड हाईकोर्ट का एक अहम फैसला राहत लेकर आया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन पारा शिक्षकों की बाद में नियमित शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई, उनकी नियमित सेवा से पहले पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि को भी पेंशन निर्धारण में शामिल किया जाएगा. अदालत ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. साथ ही भुगतान में हुई देरी पर सेवानिवृत्ति की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है.

  • यह फैसला पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई के बाद आया. इन शिक्षकों का कहना था कि वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवा देने के बावजूद नियमित नियुक्ति के बाद उनकी पूर्व सेवा को पेंशन के लिए नहीं माना गया. इससे उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि यदि नियुक्ति के समय पारा शिक्षक की सेवा को योग्यता और अनुभव के रूप में स्वीकार किया गया था, तो पेंशन के समय उसी सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है.
  • सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार स्वयं नियमित शिक्षक भर्ती में पारा शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित रखती रही है. ऐसे में उनकी पूर्व सेवा को पूरी तरह अलग मानना उचित नहीं है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पेंशन किसी प्रकार की कृपा नहीं, बल्कि कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है और सरकार को उसके अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए. इस निर्णय का प्रभाव केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं माना जा रहा है. राज्य में हजारों ऐसे पारा शिक्षक हैं, जो अब सेवानिवृत्ति के करीब हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं. ऐसे शिक्षकों को भी इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
  • झारखंड राज्य पारा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष बजरंग प्रसाद ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, यह केवल पांच शिक्षकों की जीत नहीं, बल्कि वर्षों से संघर्ष कर रहे सभी पारा शिक्षकों के सम्मान और अधिकार की जीत है. हमने लगातार यह मांग उठाई थी कि पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा को भी मान्यता मिले. उन्हें उम्मीद है कि राज्य सरकार अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए बिना देरी सभी पात्र शिक्षकों को इसका लाभ देगी. वहीं संघ के महासचिव ज्योति कुमार ने कहा पारा शिक्षक लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं.

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वर्षों की सेवा को अनदेखा नहीं किया जा सकता. अब सरकार को शीघ्र आदेश लागू कर पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि शिक्षकों को न्याय मिल सके. शिक्षा जगत में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि यदि सरकार इस आदेश को व्यापक स्तर पर लागू करती है तो हजारों पारा शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और लंबे समय से लंबित एक बड़े विवाद का समाधान भी हो सकेगा.

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