ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय, अनुशासन और कर्म फलदाता का दर्जा प्राप्त है. वे सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं, जो एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं. जब भी शनि किसी राशि से चतुर्थ या अष्टम भाव में गोचर करते हैं, तो उस राशि पर ‘शनि ढैय्या’ की शुरुआत होती है. वर्तमान में शनि देव मीन राशि में विराजमान हैं, जिसके कारण सिंह और धनु राशि के जातक इस समय शनि ढैय्या के प्रभाव का सामना कर रहे हैं. जीवन के विभिन्न मोर्चों पर इस समय को बेहद संवेदनशील माना जाता है.
कब शुरू हुई ढैय्या और कब मिलेगी पूर्ण मुक्ति?
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए शनि की ढैय्या की शुरुआत 29 मार्च 2025 को हुई थी, जब शनि ने मीन राशि में प्रवेश किया था. इन दोनों राशियों के लिए मुक्ति का समय उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है, 3 जून 2027 को शनि देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे दोनों राशियों को कष्टों से बड़ी राहत मिलेगी. वहीं, 20 अक्टूबर 2027 को शनि वक्री होकर दोबारा मीन राशि में लौट आएंगे, जिससे ढैय्या का प्रभाव फिर शुरू हो जाएगा. 23 फरवरी 2028 को शनि देव पूरी तरह से इस राशि चक्र को छोड़ देंगे. इसके बाद ही सिंह और धनु राशि के जातक ढैय्या के बंधन से पूरी तरह मुक्त होंगे.
ढैय्या के दौरान जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
इस ढाई साल की अवधि में जातकों को जीवन के कई क्षेत्रों में भारी संघर्ष करना पड़ता है. कार्यों में अचानक रुकावटें आना, व्यापार में घाटा और आर्थिक तंगी जैसी वित्तीय अस्थिरता का सामना करना पड़ता है. मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य कमजोर होता है और परिवार या कार्यस्थल पर बिना बात के वाद-विवाद बढ़ते हैं. हालांकि, ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार यह समय व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और अच्छे कर्मों का महत्व सिखाने की एक बड़ी परीक्षा भी होता है.
कष्टों को कम करने के महाउपाय
शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए ज्योतिषाचार्य ने कुछ बेहद सरल और प्रभावी उपाय बताया हैं.
- प्रतिदिन या विशेषकर शनिवार को “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र की एक माला का जाप करें और शनि चालीसा का पाठ करें.
- मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें. मान्यता है कि हनुमान भक्तों को शनि कभी प्रताड़ित नहीं करते.
- शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द की दाल, सरसों का तेल और काले कपड़ों का दान किसी जरूरतमंद को करें.
- शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें. साथ ही नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करें.
- काले कुत्ते और कौवों को रोटी खिलाएं. असहायों, वृद्धों और सफाई कर्मचारियों की मदद करें. शनि देव कर्मों के देवता हैं; आपके अच्छे कर्म ही उनके प्रकोप को कम करते हैं.


