Wednesday, June 10, 2026

झारखंड हाईकोर्ट ने वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे 39 झमाडा आश्रितों को बड़ी राहत दी है.

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धनबाद: झारखंड मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी झमाडा (JMADA) के दिवंगत कर्मचारियों के 39 आश्रितों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. करीब चार वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे आश्रितों के मामले में हाईकोर्ट ने झमाडा के प्रबंध निदेशक को नया प्रतिवेदन मिलने के बाद तीन महीने के भीतर कानून और नियमों के अनुरूप निर्णय लेने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी कहा है कि यदि फैसला आश्रितों के पक्ष में होता है तो चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति से संबंधित आवश्यक आदेश जारी किए जाएं. फैसले के बाद आश्रितों में खुशी का माहौल है और उन्होंने झमाडा प्रबंधन को कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है.

झरिया और धनबाद क्षेत्र में कार्यरत झमाडा कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनके आश्रित लंबे समय से अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं. करीब 180 आश्रित पिछले चार वर्षों से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांग उठा रहे थे. इनमें से 39 आश्रितों ने नियुक्ति नहीं मिलने पर झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और झारखंड मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत अपने मामलों पर विचार करने की मांग की.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर रखी गई दलील

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाने पर उनकी समस्या का समाधान संभव है. वहीं राज्य सरकार और झमाडा प्रबंधन की ओर से भी कहा गया कि याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकार के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया.

चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति संबंधी सभी आवश्यक आदेश जारी करने के निर्देश

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को झमाडा के प्रबंध निदेशक के समक्ष नया प्रतिवेदन दाखिल करने की अनुमति देते हुए निर्देश दिया कि प्रतिवेदन प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने के भीतर कानून और लागू नियमों के तहत निर्णय लिया जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्णय आश्रितों के पक्ष में होता है तो उसके बाद चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति संबंधी सभी आवश्यक आदेश जारी किए जाएं.

आश्रितों में जगी नई उम्मीद

हाईकोर्ट के आदेश के बाद आश्रितों में नई उम्मीद जगी है. आश्रितों ने झमाडा के प्रबंध निदेशक से मुलाकात कर कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपी और जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू करने की मांग की. उनका कहना है कि यह केवल नौकरी का मामला नहीं, बल्कि उन परिवारों के भविष्य और जीवनयापन का सवाल है, जिन्होंने अपने घर के कमाने वाले सदस्य को खो दिया है. अब सभी की निगाहें झमाडा प्रबंधन पर टिकी हैं कि अदालत के निर्देशों का पालन तय समय सीमा के भीतर कैसे किया जाता है. अब उम्मीद की जा रही है कि तय समय सीमा के भीतर निर्णय लेकर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके.

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