Wednesday, June 10, 2026

देवघर में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग मिलकर एक अभियान चलाकर दिव्यांग बच्चों को स्कूलों से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

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देवघर: झारखंड में बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग लगातार अभियान चला रहा है. रूआर कार्यक्रम के साथ-साथ ऐसे बच्चों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, जो शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग होने के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. इसी कड़ी में देवघर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग विशेष अभियान चलाकर दिव्यांग बच्चों को स्कूलों से जोड़ने की तैयारी में जुटा है. जिला शिक्षा विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, देवघर जिले में करीब 200 ऐसे बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जो शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग हैं और वर्तमान में स्कूल नहीं जा रहे हैं. संथाल परगना के छह जिलों में यह संख्या सबसे ज्यादा है.

सर्वेक्षण करके की गई दिव्यांग बच्चों की पहचान

आंकड़ों के मुताबिक, पाकुड़ जिले में 59, दुमका में 76, साहिबगंज में 47, गोड्डा में 31 और जामताड़ा में 9 ऐसे दिव्यांग बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जो स्कूल से बाहर हैं. वहीं देवघर में इनकी संख्या 200 के करीब है. जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने बताया कि देवघर भौगोलिक रूप से बड़ा जिला है और यहां व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण कर बच्चों की पहचान की गई है. उन्होंने बताया कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए विभाग विशेष अभियान चला रहा है और आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा.

समन्वय से विशेष सर्वे अभियान की शुरूआत

उन्होंने बताया कि मध्य जून से जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के समन्वय से विशेष सर्वे अभियान शुरू होगा. इसके तहत ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले उन दिव्यांग बच्चों की पहचान की जाएगी, जो अब तक शिक्षा से वंचित हैं. चिन्हित बच्चों को स्कूलों से जोड़ने और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा.

प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत

देवघर के समाजसेवी सूरज झा का कहना है कि कई मामलों में अभिभावक भी दिव्यांग बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति गंभीर नहीं होते. समाज में अब भी यह धारणा मौजूद है कि शारीरिक रूप से कमजोर बच्चे शिक्षा या अन्य क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि इस सोच को बदलने की आवश्यकता है और प्रशासन को जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों तक पहुंचना चाहिए.

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना उद्देश्य

वहीं झामुमो के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुरेश साह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को लेकर जागरूकता की कमी है. ऐसे में प्रशासन का यह अभियान केवल बच्चों को ही नहीं बल्कि अभिभावकों और समाज को भी जागरूक करने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है, चाहे वह किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक चुनौती का सामना क्यों न कर रहा हो.

दिव्यांग बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए अभिभावकों को सरकार की तरफ से धनराशि से भी मदद की जाती है ताकि वह हर दिन बच्चों को स्कूल पहुंचा सके. गौरतलब है कि देवघर और संथाल परगना के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दिव्यांग बच्चे शिक्षा से दूर हैं. ऐसे बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है, इस पर सभी की नजर टिकी है: मधुकर कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक

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