गर्मी का मौसम आते ही एसी हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन जाता है, लेकिन हर साल एसी से जुड़ी कई बुरी ख़बरें भी सामने आती है. हर साल देशभर के कई इलाकों से एसी ब्लास्ट होने, फटने या आग पकड़ जाने की ख़बरें आती है, जिसमें कुछ लोगों की जान भी चली जाती है. ऐसे में आजकल यह एक बड़ा सवाल बन गया है कि आखिर एक कूलिंग मशीन अचानक इतनी खतरनाक बनकर आग कैसे पकड़ लेती है.
AC काम कैसे करता है – पहले ये समझें
एसी ब्लास्ट क्यों और कैसे होता है? इस बात को समझने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि एयर कंडीशनर यानी एसी काम कैसे करता है. एसी का पूरा प्रोसेस चार मुख्य पार्ट्स में काम करते हैं:
पहला – रेफ्रिजरेंट गैस: यह एसी की जान होती है. यह एक खास केमिकल होता है, जो बहुत आसानी से गैस से लिक्विड और लिक्विड से गैस में बदलता रहता है. जब भी कोई लिक्विड गैस बनता है तो वो अपने आसपास से गर्मी खींचता है, जो एसी की ठंडक का असली राज है.
दूसरा – कम्प्रेसर: कम्प्रेसर किसी भी एसी का इंजन होता है, जो बाहर वाली यूनिट में होता है. इसका काम रेफिजरेंट गैस को जोर से दबाना है. जब गैस दबती है तो उसका प्रेशर और तापमान दोनों बढ़ जाते हैं और वो बहुत गर्म भी हो जाती है.
तीसरा – कंडेंसर कॉइल: कंडेंसर कॉइल भी एसी के बाहर वाली यूनिट में होता है. कम्प्रेसर से आई गर्म गैस यहां आती है और बाहर की हवा इसे ठंडा करती है. ठंडा होते ही गैस वापस लिक्विड बन जाती है. यानी कमरे की गर्मी इस कॉइल के जरिए बाहर छोड़ दी जाती है. इसी कारण एसी की बाहरी यूनिट के पास खड़े होने पर गर्म हवा महसूस होती है.
चौथा – इवेपोरेटर कॉइल: यह पार्ट एसी के अंदर वाली यूनिट में होता है. बाहर से ठंडा होकर आया लिक्विड रेफ्रिजरेंट यहां आता है और अचानक फैलकर वापस गैस बन जाता है. गैस बनते वक्त यह आसपास की सारी गर्मी सोख लेता है, जिससे कॉइल बर्फ जैसी ठंडी हो जाती है. इसी ठंडी कॉइल के सामने से पंखा गुजारता है और वो ठंडी हवा कमरे में आती है.
यह पूरा चक्र – गैस → दबाव → गर्मी बाहर → लिक्विड → फैलाव → ठंडक → वापस गैस – बिना रुके हर सेकंड चलता रहता है जब तक AC ऑन है.
एसी असल में एक ऐसी मशीन है, जो गर्मी को ट्रांसफर करती है, न कि ठंडक बनाती है. यही च्रक जब किसी कारण से बिगड़ जाता है तो एसी में ब्लास्ट या आग लगने का खतरा पैदा हो जाता है. आइए अब हम इनके कारणों को समझते हैं.
AC में आग क्यों लगती है?
पहला कारण: कम्प्रेसर का ओवरहीट होना
यह कारण सबसे ज्यादा कॉमन है. ज्यादातर AC ब्लास्ट की वजह कम्प्रेसर का फेल होना ही होता है. गर्माी के मौसम में एसी लगातार कई घंटों तक चलता रहता है. इस दौरान कम्प्रेसर पर बहुत ज्यादा लोड पड़ता है. जब कंडेंसर कॉइल पर धूल, मिट्टी और मिनरल स्केल जमा हो जाते हैं, तो एसी पर्याप्त गर्मी बाहर गर्मी को बाहर नहीं निकाल पाता है. इससे लगातार चलता रहता है और कम्प्रेसर का प्रेशर और तापमान दोनों बढ़ते रहते हैं, जो आखिरकार उसे फेल कर देते हैं.
दूसरा कारण: रेफ्रिजरेंट लीक – सबसे बड़ा खतरा
AC रेफ्रिजरेंट केमिकल पर निर्भर करता है, और अगर यह लीक हो जाए तो खतरनाक स्थिति बन सकती है. किसी चिंगारी के संपर्क में आने पर यह रेफ्रिजरेंट भड़क सकता है. आजकल भारत में नए AC में R32 रेफ्रिजरेंट का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जो पुराने R22 और R410A का एनवायरनमेंट-फ्रेंडली विकल्प है. R32 माइल्डली फ्लेमेबल (Class A2L) है, यानी यह हल्का जलनशील है. यह हवा से भारी होता है, इसलिए लीक होने पर कमरे के निचले हिस्से में जमा हो सकता है और एक निश्चित कंसंट्रेशन पर आग पकड़ सकता है.
R290 (प्रोपेन) जैसे रेफ्रिजरेंट और भी ज्यादा खतरनाक है – इनका एक्सप्लोजन लिमिट रेंज 2.1% से 9.5% के बीच है, यानी बहुत कम कंसंट्रेशन पर भी विस्फोट हो सकता है. जब रेफ्रिजरेंट लाइन ब्लॉक या डैमेज हो जाती है, तो पहला संकेत यह होता है कि AC ठीक से ठंडा नहीं करता. इस संकेत को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.
तीसरा कारण: खराब वायरिंग और इलेक्ट्रिकल फॉल्ट
AC में खराब वायरिंग, जाम हो चुके एयर फिल्टर, ओवरहीट होता कम्प्रेसर, और लापरवाही से की गई इंस्टॉलेशन – ये सब मिलकर AC को आग की भट्टी बना सकते हैं.
डैमेज फ्यूज, तार और कनेक्टर यूनिट को सही तरीके से काम नहीं करने देते और यह इलेक्ट्रिकल खराबी गंभीर अग्नि खतरा बन सकती है. खराब इलेक्ट्रिकल पार्ट्स में फ्लेमेबल एसिड बन सकता है, जो एक बार आग पकड़े तो रेफ्रिजरेंट लाइन तक पहुंच सकता है.
AC को एक्सटेंशन कॉर्ड से चलाना भी बड़े खतरे की वजह बन सकता है. इसे हमेशा सीधे दीवार के ज्यादा पॉवर वाले सॉकेट में लगाकर ही चलाना चाहिए.
चौथा कारण: गलत सर्विसिंग और ओवरचार्जिंग
अगर कोई कम जानकार टेक्नीशियन AC में जरूरत से ज्यादा रेफ्रिजरेंट भर दे, या गलत टाइप का रेफ्रिजरेंट डाल दे, तो यह कम्प्रेसर के लिए जानलेवा हो सकता है.
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि R32 को पुराने R22 या R410A सिस्टम में डालना खतरनाक है. ये गैसें एक-दूसरे के साथ कम्पैटिबल नहीं हैं और ऐसा करने से सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.
पांचवा कारण: वोल्टेज की समस्या
पावर सर्ज या बहुत कम वोल्टेज भी इलेक्ट्रिकल मालफंक्शन की वजह बन सकता है, जो खराब एसी यूनिट की ओर ले जाता है. भारत की गर्मियों में बिजली की डिमांड बढ़ने पर वोल्टेज फ्लक्चुएशन आम बात है, जो AC के इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट को नुकसान पहुंचा सकता है.
ये कुछ मुख्य कारण हैं, जिनकी वजहों से घर में लगे एसी में आग पकड़ जाती है या वो ब्लास्ट हो जाता है. आइए अब हम आपको बताते हैं कि एसी में आग वाले खतरे से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए.
बचाव के तरीके: ये 7 काम जरूर करें
- साल में दो बार सर्विस कराएं:एयर कंडीशनर यानी एसी सिस्टम को साल में कम से कम दो बार किसी अच्छे टेक्नीशियन से सर्विस कराना चाहिए.
- फिल्टर हर 3-4 हफ्ते में साफ करें:गंदी कॉइल, जंग लगे कंट्रोल, और बिना ग्रीस के बेयरिंग – ये सभी चीज ओवरहीटिंग और इलेक्ट्रिकल स्ट्रेन का कारण बनते हैं. कंडेंसेट ड्रेन में मोल्ड या गंदगी से मेटल खराब होती है और इंसुलेशन टूटती है.
- AC को सीधे वॉल सॉकेट से चलाएं:AC जैसे भारी उपकरण को हमेशा सीधे दीवार के सॉकेट में लगाएं. एक्सटेंशन कॉर्ड या पावर स्ट्रिप का इस्तेमाल आग का कारण बन सकता है.
- वोल्टेज स्टेबलाइजर लगवाएं:एसी के साथ-साथ अपने घर पर वोल्टेज स्टेबलाइजर भी लगवाएं. खासतौर पर अगर आपके घर या इलाके में बिजली आपूर्ति की समस्या होती है यानी बिजली कभी भी आती-जाती रहती है तो आपको एक अच्छा वोल्टेज स्टेबलाइजर लगवाना चाहिए, जो एसी को वोल्टेज फ्लक्चुएशन से बचाता है.
- लीक के संकेतों को पहचानें:अगर AC से हिसिंग साउंड आए, ठंडक अचानक कम हो जाए, या कमरे में किसी केमिकल जैसी गंध आए, तो तुरंत एसी बंद करें और किसी अच्छे और योग्य टेक्नीशियन को बुलाएं. ऐसी परिस्थिति में रेफ्रिजरेंट लाइनें टूट या फट सकती हैं, इसलिए लीक रिपेयर सर्विस लेना जरूरी है.
- सिर्फ BEE-सर्टिफाइड टेक्नीशियन से सर्विस कराएं:अगर टेक्नीशियन जानकार न हो और वो गलती से कम्प्रेसर में ऑक्सीजन भर दे या सिर्फ एक वाल्व खोले, तो विस्फोट हो सकता है. इस कारण आप कभी भी अपने घर में एसी फिटिंग करने या रिपेयर करने के लिए आम टेक्निशियन को न बुलाए बल्कि हमेशा सर्टिफाइड और अनुभवी टेक्नीशियन से ही काम करवाएं.
- आउटडोर यूनिट के आसपास जगह रखें:एसी के आउटडोर यूनिट के आसपास कम से कम एक मीटर की खाली जगह रखना भी जरूरी होता है, ताकि गरम हवा निकल सके. अगर यह जगह बंद हो जाए, तो कम्प्रेशर पर लोड बढ़ जाता है, जो एसी में आग लगने का खतरा पैदा कर सकता हैं.
जरूरी टिप्स
अगर एसी से धुआं निकले, जलने की गंध आए या असामान्य आवाज आए तो तुरंत बिजली का मेन स्विच ऑफ करें और कमरे से बाहर निकलें. ऐसे में खुद कुछ ठीक करने की कोशिश न करें.
एसी एक बड़ी जटिल थर्मोडायनामिक मशीन है. इसकी देखभाल में लापरवाही कभी-कभी बड़े हादसे में बदल जाती है. नियमित सर्विसिंग और सही इलेक्ट्रिकल सेटअप से इसे पूरी तरह टाला जा सकता है.
लिहाजा, आप इन तमाम जानकारियों को जानकर समझ सकते हैं कि किसी भी घर में फिट एसी में आग क्यों और कैसे लगती है और इससे बचने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है.


