Thursday, May 21, 2026

झारखंड में थोक और खुदरा दवा दुकानें आज बंद रही.

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रांची: ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स और झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (JCDA) के संयुक्त आह्वान पर आज बुधवार को झारखंड के 18 हजार से ज्यादा थोक और खुदरा दवा दुकानें बंद रहीं. हालांकि झारखंड के सरकारी और निजी अस्पतालों की फार्मेसी दुकानों को बंद से अलग रखा गया है.

तीन मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल

इस संबंध में झारखंड ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश कार्यालय सचिव संजीव बनर्जी ने बताया कि मुख्यतः तीन मांगों को लेकर आज दवा दुकानदारों की राष्ट्रव्यापी बंदी है और झारखंड में आज का बंद पूरी तरह सफल है. उन्होंने बताया कि इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन फार्मेसी के अनियंत्रित विस्तार और कॉरपोरेट कंपनियों की कथित शोषणकारी मूल्य निर्धारण नीति के खिलाफ आवाज उठाना है.

संजीव बनर्जी ने कहा कि कोरोना काल में दवाओं को घर-घर पहुंचाने का निर्देश केंद्र की सरकार द्वारा दिया गया था, तब केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने उस वक्त के हालात देखते हुए सरकार के निर्णय का स्वागत किया था, लेकिन वह व्यवस्था आज भी चली आ रही है और कई तरह की गड़बड़ी इस व्यवस्था के तहत हो रही है. आज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त सत्यापन के दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग हो रहा है. साथ ही एआई आधारित फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं की उपलब्धता बढ़ रही है, जिससे एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) का खतरा बढ़ा है.

डीप डिस्काउंटिंग का भी विरोध

इसके अलावा, बड़े कॉरपोरेट घरानों द्वारा “डीप डिस्काउंटिंग” के जरिए बाजार संतुलन बिगाड़ने का काम किया जा रहा है. संजीव बनर्जी ने कहा कि आवश्यक दवाओं की कीमतें पहले से ही सरकार द्वारा नियंत्रित हैं. बावजूद इसके कॉरपोरेट कंपनियां अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं, जिससे छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के केमिस्टों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है.

एसोसिएशन के नेताओं ने कहा कि केंद्र की सरकार को GSR 220 E को ऑनलाइन दवा बेचने का अधिकार देती है उसे रद्द किया जाए, क्योंकि इससे नकली दवाएं भी जनता के बीच खपाई जाती हैं. आज राजधानी रांची सहित राज्यभर में अधिकांश थोक और खुदरा दवा की दुकानें बंद हैं और जरूरत पड़ने पर लोग अस्पतालों के दवा दुकानों से दवा लेने को मजबूर हैं.

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