Saturday, April 18, 2026

अमेरिकी-ईरान शांति वार्ता और कच्चे तेल में गिरावट से बाजार में तेजी रही; सेंसेक्स 504 अंक चढ़कर 78,493 और निफ्टी 24,353 पर बंद हुआ.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह राहत और रिकवरी भरा रहा. वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की खबरों ने निवेशकों के बीच नया आत्मविश्वास पैदा किया है. इसके परिणामस्वरूप, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, मजबूती के साथ बंद हुए.

बाजार का प्रदर्शन और प्रमुख आंकड़े
शुक्रवार को कारोबार की समाप्ति पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 504.86 अंक (0.65%) की बढ़त के साथ 78,493.54 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 156.80 अंक (0.65%) चढ़कर 24,353.55 पर पहुंच गया. बाजार में यह तेजी केवल दिग्गज शेयरों तक सीमित नहीं थी; व्यापक बाजार (Broader Market) ने मुख्य सूचकांकों को पछाड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया. निफ्टी मिडकैप में 1.27% और स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 1.48% की वृद्धि दर्ज की गई.

तेजी के पीछे के मुख्य कारक
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह की सकारात्मकता के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक रहे:

  • शांति वार्ता की उम्मीद: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक चर्चाओं और संभावित संघर्ष विराम की खबरों ने वैश्विक अनिश्चितता को कम किया, जिससे जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) बढ़ी.
  • कच्चे तेल में गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए वरदान साबित हुई. इसने मुद्रास्फीति की चिंताओं को कम कर सेंटीमेंट को बूस्ट दिया.
  • रुपये में मजबूती: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति में सुधार ने भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया.

सेक्टोरल अपडेट और संस्थागत निवेश
क्षेत्रवार प्रदर्शन देखें तो FMCG, मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स सबसे आगे रहे, जिनमें 1% से 3% के बीच खरीदारी देखी गई. हालांकि, आईटी (IT) सेक्टर में सुस्ती रही और यह एक पिछलग्गू (Laggard) के रूप में उभरा.

एक महत्वपूर्ण बदलाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख में देखा गया. लंबे समय तक बिकवाली करने के बाद, सप्ताह के आखिरी तीन सत्रों में FII शुद्ध खरीदार (Net Buyers) रहे, जिससे बाजार को स्थिरता मिली. हालांकि, साप्ताहिक आधार पर उनका शुद्ध प्रवाह करीब 250 करोड़ रुपये नकारात्मक रहा. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की, जिसके चलते सप्ताह के दौरान उनकी ओर से लगभग 6,300 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई.

इनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, बाजार अब एक ‘ट्रांजिशन फेज’ में है. उन्होंने कहा कि हालांकि सेंटीमेंट मजबूत हो रहा है, लेकिन बाजार ने अभी तक ऊपरी स्तरों पर एक निर्णायक ब्रेकआउट नहीं दिया है. विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों और शांति वार्ता के ठोस परिणामों पर निर्भर करेगी.

कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार अब एक ‘कौशियस ऑप्टिमि

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