केंद्र सरकार ने बिहार में चल रही सियासी हलचल के बीच रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को नया राज्यपाल नियुक्त किया है। आईए जानते हैं उनके बारे में 10 प्वाइंट्स में…
पटना। बिहार में चल रही सियासी और प्रशासनिक हलचलों के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
यह अहम फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है, जब सूबे में मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। जनरल हसनैन भारतीय सेना के एक बेहद अनुभवी और सम्मानित अधिकारी रहे हैं।
बिहार के नए राज्यपाल से जुड़े 10 प्वाइंट
- 4 दशकों का गौरवशाली सैन्य करियर और कश्मीर में खास योगदान
- जनरल हसनैन ने लगभग 40 सालों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी हैं।
- जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में शांति बहाली और आतंकवाद पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
- कश्मीर घाटी में स्थानीय लोगों का दिल जीतने के लिए ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ (जन-केंद्रित नीति) नाम की एक खास रणनीति अपनाई।
- अपने लंबे सेवाकाल के दौरान वे श्रीलंका में तैनात की गई ‘भारतीय शांति सेना’ (IPKF) का हिस्सा रहे।
- इसके अलावा, पंजाब में आतंकवाद के काले दौर, पूर्वोत्तर के अशांत इलाकों और दुनिया के सबसे दुर्गम युद्धक्षेत्र ‘सियाचिन ग्लेशियर’ में भी उन्होंने शानदार तरीके से नेतृत्व किया।
- सेना में अपनी लंबी पारी खेलने के बाद, जनरल हसनैन साल 2013 में ‘मिलिट्री सेक्रेटरी’ (सैन्य सचिव) के पद से सेवानिवृत्त हुए।
- देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें ‘परम विशिष्ट सेवा मेडल’ (PVSM) और ‘उत्तम युद्ध सेवा मेडल’ (UYSM) जैसे सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
- साल 2018 में उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलाधिपति (चांसलर) बनाया गया था।
- वे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों के जाने-माने जानकार हैं और देश-दुनिया के कई मंचों पर अपने विचार रखते हैं।
जनरल हसनैन की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से हुई है, जिसके बाद उन्होंने लंदन के किंग्स कॉलेज से भी पढ़ाई की। आज उन्हें उनकी दूरदर्शी सोच और शांति कायम करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है।


