26 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
टेक्नोलॉजी डेस्क: स्मार्ट टीवी पर पसंदीदा शो और फिल्में देखना आज आम बात है, लेकिन क्या आपका टीवी आपकी देखने की आदतों के साथ-साथ घर में होने वाली आवाजों से जुड़ा डेटा भी इकट्ठा कर सकता है? साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर के एक दावे ने स्मार्ट टीवी की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रिसर्चर का दावा है कि वर्ष 2025 के कुछ सैमसंग टीवी में इस्तेमाल होने वाला Tizen ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर्स की देखने की गतिविधियों और विज्ञापनों से जुड़े डेटा को ट्रैक करने में सक्षम है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस मामले पर सैमसंग की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं है।
रिसर्चर ने Samsung TV के सॉफ्टवेयर में क्या पाया?
रिपोर्ट के अनुसार, log4j नाम से पहचाने जाने वाले एक ऑनलाइन साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर ने सैमसंग टीवी के Tizen ऑपरेटिंग सिस्टम की जांच की। रिसर्चर ने 21 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी शुरुआती जानकारी साझा की।
उसका दावा है कि टीवी के सॉफ्टवेयर में डेटा एकत्र करने, ऑडियो से जुड़ी गतिविधियों का विश्लेषण करने, स्क्रीनशॉट लेने और विज्ञापन ट्रैकिंग से संबंधित कोड मिला। रिसर्चर ने यह भी आशंका जताई कि विज्ञापन पहचान संख्या (Advertising ID) के जरिए अलग-अलग डिवाइस पर यूजर्स की गतिविधियों को आपस में जोड़ा जा सकता है।
हालांकि, इन निष्कर्षों की स्वतंत्र तकनीकी जांच और पुष्टि के बिना यह कहना सही नहीं होगा कि सभी सैमसंग स्मार्ट टीवी इस तरह काम करते हैं या हर यूजर का निजी डेटा रिकॉर्ड किया जा रहा है।
क्या टीवी आपकी देखने की आदतों को ट्रैक कर सकता है?
रिसर्चर के मुताबिक, टीवी में मौजूद कुछ तकनीकी सिस्टम वीडियो देखने, विज्ञापनों को स्किप करने और किसी वीडियो को कितनी देर तक देखा गया, जैसी गतिविधियों का विश्लेषण कर सकते हैं।
उसने कंप्यूटर विजन और न्यूरल नेटवर्क से जुड़े टूल्स का भी उल्लेख किया। ऐसे सिस्टम स्क्रीन पर दिखाई देने वाली सामग्री की पहचान और उसके विश्लेषण में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि देखने की गतिविधियों का डेटा एकत्र करना और कमरे में होने वाली निजी बातचीत को रिकॉर्ड करना दो अलग-अलग बातें हैं। रिसर्चर के दावों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि टीवी लगातार घर की बातचीत सुन रहा है।
माइक्रोफोन न होने पर भी ऑडियो रिकॉर्डिंग संभव?
इस मामले का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला दावा ऑडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ा है। रिसर्चर का कहना है कि जिन टीवी में बिल्ट-इन माइक्रोफोन नहीं है, उनमें भी ऐसा कोड दिखाई दिया जो साउंडबार या ब्लूटूथ जैसे माइक्रोफोन वाले कनेक्टेड डिवाइस खोज सकता है।
उसके अनुसार, ऐसे डिवाइस के माध्यम से ऑडियो रिकॉर्डिंग की संभावना की जांच की जानी चाहिए। लेकिन केवल किसी डिवाइस को खोजने वाले कोड की मौजूदगी से यह साबित नहीं होता कि ऑडियो रिकॉर्डिंग वास्तव में हुई या रिकॉर्ड की गई आवाज किसी सर्वर पर भेजी गई।
इसलिए इस दावे को फिलहाल एक तकनीकी आशंका के रूप में देखना चाहिए, न कि पुष्टि किए गए तथ्य के रूप में।
Flipper Zero टेस्ट में क्या सामने आया?
खबर के अनुसार, Hugging Face के इंजीनियर Ngxson ने Flipper Zero डिवाइस की मदद से एक परीक्षण किया। उन्होंने 23 अक्टूबर 2026 को X पर साझा पोस्ट में बताया कि उनके टीवी का माइक्रोफोन लगभग पांच सेकंड के लिए चालू हुआ और फिर बंद हो गया। उनके मुताबिक, कई घंटों तक माइक्रोफोन दोबारा सक्रिय नहीं हुआ।
हालांकि, बताया गया है कि उनका टीवी रूट किया हुआ था और कई सेटिंग्स बंद थीं। ऐसे में इस परीक्षण के नतीजों को सभी सामान्य टीवी पर लागू नहीं किया जा सकता। इस घटना से अकेले यह भी साबित नहीं होता कि माइक्रोफोन ने निजी बातचीत रिकॉर्ड की या उसका डेटा कहीं भेजा।
स्मार्ट टीवी यूजर्स अपनी प्राइवेसी कैसे सुरक्षित रखें?
स्मार्ट टीवी इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां अपनाकर निजी जानकारी साझा होने की आशंका कम की जा सकती है:
- प्राइवेसी सेटिंग्स जांचें: टीवी की सेटिंग्स में जाकर डेटा संग्रह, विज्ञापन वैयक्तिकरण और देखने की गतिविधियों से जुड़े विकल्पों की समीक्षा करें।
- वॉयस फीचर पर ध्यान दें: यदि टीवी या उससे जुड़े डिवाइस में वॉयस असिस्टेंट या माइक्रोफोन की सुविधा है, तो उसकी अनुमति और सेटिंग्स जांचें।
- अनावश्यक कनेक्शन बंद रखें: जिन कनेक्टेड डिवाइस या सुविधाओं की जरूरत नहीं है, उन्हें डिस्कनेक्ट करने पर विचार करें।
- सॉफ्टवेयर अपडेट करें: टीवी के लिए उपलब्ध आधिकारिक अपडेट इंस्टॉल रखें।
- प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें: निर्माता की नीति में देखें कि कौन-सा डेटा एकत्र किया जाता है, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता है और उसे साझा करने के क्या नियम हैं।
अलग-अलग मॉडल और सॉफ्टवेयर संस्करणों में सेटिंग्स के नाम और विकल्प भिन्न हो सकते हैं।
Samsung की प्रतिक्रिया का इंतजार
स्मार्ट टीवी से जुड़ी प्राइवेसी चिंताएं नई नहीं हैं। पहले भी विभिन्न स्मार्ट टीवी कंपनियों के डेटा संग्रह और यूजर ट्रैकिंग तरीकों पर सवाल उठते रहे हैं। मौजूदा मामले में रिसर्चर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की बात कह रहा है, जिसमें उसकी जांच की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।
फिलहाल, सैमसंग की ओर से इस मामले पर आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है। विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट और स्वतंत्र जांच सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बताए गए कोड का वास्तविक इस्तेमाल क्या है और यूजर्स की प्राइवेसी पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है।
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