पटना, बिहार | 12 अक्टूबर 2026: बिहार की राजधानी पटना में लंबित आपराधिक मामलों के अनुसंधान और निष्पादन में कथित लापरवाही को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। ग्रामीण एसपी कोमल मीणा ने सितंबर महीने के कामकाज की समीक्षा के बाद जिले के 11 थानों के 72 पुलिस पदाधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है।
पुलिस अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा के दौरान मामलों के निष्पादन की गति निर्धारित न्यूनतम लक्ष्य से कम पाई गई। इसके अलावा जांच में सुस्ती, काम के प्रति लापरवाही और वरीय अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी जैसी कमियां भी सामने आने की बात कही गई है।
सितंबर में कामकाज की समीक्षा के बाद कार्रवाई
ग्रामीण एसपी कोमल मीणा ने लंबित कांडों के अनुसंधान और निष्पादन की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान जिन पुलिस पदाधिकारियों का प्रदर्शन तय मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया, उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
पुलिस प्रशासन का उद्देश्य लंबित मामलों की जांच में तेजी लाना और निर्धारित समय में कांडों के निष्पादन की दिशा में प्रगति सुनिश्चित करना है। वेतन रोकने का आदेश अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा।
पटना के इन 11 थानों के पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन थानों के पुलिस पदाधिकारियों का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है, उनकी सूची इस प्रकार है:
| क्रम संख्या | थाना | प्रभावित पुलिस पदाधिकारियों की संख्या |
|---|---|---|
| 1 | बख्तियारपुर थाना | 13 |
| 2 | बाढ़ थाना | 11 |
| 3 | अथमलगोला थाना | 10 |
| 4 | फतुहा थाना | 8 |
| 5 | खुसरुपुर थाना | 7 |
| 6 | पंडारक थाना | 6 |
| 7 | दीदारगंज थाना | 5 |
| 8 | सालिमपुर थाना | 5 |
| 9 | मरांची थाना | 3 |
| 10 | मोकामा थाना | 2 |
| 11 | नदी थाना | 2 |
| कुल | 11 थाने | 72 पदाधिकारी |
इस सूची के अनुसार, बख्तियारपुर थाना के 13 पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, जो सूची में सबसे अधिक संख्या है। इसके बाद बाढ़ थाना के 11 और अथमलगोला थाना के 10 पदाधिकारी शामिल हैं।
लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने पर जोर
आपराधिक मामलों का समय पर अनुसंधान और निष्पादन पुलिस व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी है। मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से जांच की प्रगति प्रभावित हो सकती है और संबंधित पक्षों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई को लंबित कांडों की समीक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इसका मकसद पुलिस पदाधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप काम करने के लिए प्रेरित करना है।
लापरवाही पर आगे भी कार्रवाई के संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण एसपी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने, काम में लापरवाही बरतने और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रह सकती है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज होने की बात कही गई है। अब यह देखना होगा कि संबंधित थानों में लंबित मामलों के अनुसंधान और निष्पादन की गति में कितना सुधार आता है।
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