Saturday, October 10, 2026

गयाजी पितृपक्ष मेले में 16 दिनों में 1200 करोड़ का कारोबार, 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे.

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गया, 10 अक्टूबर 2026: बिहार के गयाजी में आयोजित पितृपक्ष मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए भी बड़ा अवसर बनकर सामने आया है। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चले 16 दिवसीय मेले में जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 51 लाख 30 हजार 110 श्रद्धालु पहुंचे। गया के व्यापारिक संगठनों ने इस दौरान करीब 1,200 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया है।

पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण पूजा सामग्री, भोजन, होटल, धर्मशाला, स्थानीय परिवहन, कपड़े और बर्तनों की मांग बढ़ी। हालांकि, कारोबार का आंकड़ा आधिकारिक रूप से सत्यापित कुल बिक्री नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और संबंधित संगठनों का अनुमान है।

प्रति श्रद्धालु खर्च से समझिए कारोबार का गणित

गया चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रमोद भदानी के मुताबिक, एक श्रद्धालु के स्थानीय खर्च में ऑटो-टोटो का किराया, पूजा सामग्री, होटल में ठहरना, भोजन, बर्तन और दक्षिणा जैसी मदें शामिल होती हैं।

उनके अनुमान के अनुसार, स्थानीय परिवहन पर करीब 300 रुपये, पूजा सामग्री पर 750 रुपये, होटल पर 750 रुपये, भोजन पर 500 रुपये, बर्तनों पर 500 रुपये और दक्षिणा के रूप में लगभग 500 रुपये खर्च हो सकते हैं। इस तरह इन मदों पर प्रति व्यक्ति खर्च 3,300 रुपये से अधिक बैठता है। घर से गया आने-जाने का किराया और अन्य खर्च जोड़ने पर कुल राशि करीब 5,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

हालांकि, सभी श्रद्धालुओं का खर्च एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग अपनी गाड़ी से आते हैं, जबकि कई श्रद्धालु होटल के बजाय धर्मशालाओं या सरकारी आवासीय सुविधाओं में ठहरते हैं। इसी वजह से वास्तविक खर्च में अंतर संभव है।

भोजन पर 125 से 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान

पितृपक्ष मेले के दौरान भोजन कारोबार को भी बड़ा लाभ मिलने का अनुमान है। स्थानीय व्यापारिक प्रतिनिधियों के मुताबिक, श्रद्धालुओं ने भोजन पर करीब 125 से 150 करोड़ रुपये खर्च किए होंगे।

इसमें छोटे भोजनालय, सड़क किनारे की दुकानें, मिठाई की दुकानें, कैटरिंग सेवाएं, रेस्टोरेंट और अन्य खानपान प्रतिष्ठान शामिल हैं। श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही से इन कारोबारों में मांग बढ़ी और स्थानीय दुकानदारों को अतिरिक्त ग्राहकों का लाभ मिला।

पूजा सामग्री और बर्तनों का कारोबार 250 करोड़ रुपये से अधिक

पिंडदान और श्राद्ध कर्म में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की मांग मेले के दौरान काफी बढ़ी। व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, पूजा सामग्री और बर्तनों के कारोबार का आंकड़ा 250 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

इसमें तिल, जौ का आटा, फूल-माला, अगरबत्ती, मिट्टी के दीपक, पीतल के बर्तन और अन्य धार्मिक सामग्री शामिल हैं। कई श्रद्धालु पूजा-पाठ के साथ अपने परिवारों के लिए भी बर्तन और अन्य सामान खरीदते हैं, जिससे बाजार में बिक्री बढ़ती है।

होटल और टूर-ट्रैवल कारोबार में 225 करोड़ रुपये से अधिक की उम्मीद

होटल एसोसिएशन के महासचिव सुदामा के अनुसार, 16 दिनों के दौरान होटल और टूर-ट्रैवल क्षेत्र में संयुक्त रूप से करीब 225 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का अनुमान है।

इसमें गयाजी और बोधगया के होटल तथा यात्रा सेवाएं शामिल हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के धर्मशालाओं और सरकारी आवासीय सुविधाओं में ठहरने के कारण व्यावसायिक होटलों को अपेक्षा के अनुरूप कारोबार नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।

स्थानीय परिवहन से 10 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का अनुमान

मेले के दौरान श्रद्धालुओं ने पिंड वेदियों, रेलवे स्टेशन, होटल और अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी और छोटी-बड़ी गाड़ियों का इस्तेमाल किया।

पंडा मणि लाल बारीक के मुताबिक, गयाजी शहर में स्थानीय परिवहन से 10 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। हालांकि, रेलवे और बसों के किराए सहित श्रद्धालुओं के कुल परिवहन खर्च का कोई समेकित सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं बताया गया है।

पांच लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने का दावा

गया चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रमोद भदानी का अनुमान है कि मेले से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पांच लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला होगा। इसमें पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदार, होटल कर्मचारी, वाहन चालक, मजदूर, सफाईकर्मी, भोजनालय संचालक और तीर्थयात्रियों की सेवा में लगे लोग शामिल हैं।

विष्णुपद मंदिर, सीता कुंड, प्रेतशिला पर्वत, रामशिला और अन्य पिंड वेदियों के आसपास बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें लगती हैं। इन दुकानों और सेवा गतिविधियों से स्थानीय लोगों को मौसमी रोजगार मिलता है।

हालांकि, रोजगार से संबंधित यह आंकड़ा भी व्यापारिक संगठन का अनुमान है। इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सरकारी खजाने को भी मिलता है राजस्व

पितृपक्ष मेले से जुड़े कारोबार और यात्रा गतिविधियों के कारण केंद्र तथा राज्य सरकारों को भी विभिन्न माध्यमों से राजस्व मिलता है। इनमें परिवहन, ईंधन और वस्तुओं पर लागू कर शामिल हो सकते हैं।

पंडा मणि लाल बारीक के अनुसार, मेले से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी खजाने में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में अलग-अलग कर मदों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

पिछले पांच वर्षों में लगातार बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

व्यापारिक संगठनों के उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, पिछले वर्षों में पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की संख्या और कारोबार दोनों में बढ़ोतरी देखी गई है।

वर्षश्रद्धालुओं की संख्याअनुमानित कारोबार
20229.40 लाख150–200 करोड़ रुपये
202329.89 लाख450–500 करोड़ रुपये
202430.59 लाखलगभग 500 करोड़ रुपये
202534.79 लाखलगभग 600 करोड़ रुपये
202651.30 लाखलगभग 1,200 करोड़ रुपये

ये आंकड़े व्यापारिक अनुमानों पर आधारित हैं। अलग-अलग वर्षों में कारोबार की गणना का तरीका और खर्च की श्रेणियां अलग हो सकती हैं, इसलिए इनकी तुलना करते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती

गयाजी का पितृपक्ष मेला देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण स्थानीय बाजार, परिवहन, आवासन और खानपान क्षेत्र को बड़े पैमाने पर गतिविधियां उपलब्ध कराता है। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या 51 लाख से अधिक पहुंचने से कारोबार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।

हालांकि, 1,200 करोड़ रुपये का आंकड़ा व्यापारिक संगठनों का अनुमान है, न कि सभी व्यवसायों की सत्यापित बिक्री का आधिकारिक लेखा-जोखा। इसके बावजूद, मेले का पैमाना गयाजी में धार्मिक पर्यटन और उससे जुड़े स्थानीय कारोबार के महत्व को रेखांकित करता है।

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