Thursday, October 8, 2026

बांका की शिक्षिका खुशबू कुमारी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, गांव में शिक्षा के साथ सामाजिक बदलाव की मिसाल.

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बांका, 8 अक्टूबर 2026: बांका जिले के सुदूर बिदायडीह गांव में शिक्षा और सामाजिक बदलाव की दिशा में उल्लेखनीय काम करने वाली प्रधान शिक्षिका खुशबू कुमारी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

खुशबू कुमारी ने सरकारी स्कूल में पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने और गांव में सामाजिक समरसता मजबूत करने पर भी काम किया।

घर-घर पहुंचकर बच्चों को स्कूल से जोड़ा

बिदायडीह में प्रधान शिक्षिका के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद उनके सामने बच्चों को नियमित स्कूल लाने की बड़ी चुनौती थी। उन्होंने अभिभावकों से संपर्क के लिए घर-घर जाने का अभियान शुरू किया।

इस प्रयास का असर स्कूल की उपस्थिति पर दिखाई दिया। बच्चों की उपस्थिति करीब 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो गई।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को स्कूल आने के लिए जरूरी सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए उन्होंने अपने स्तर पर जूते-मोजे, टाई-बेल्ट और पहचान-पत्र उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया। कुछ ही महीनों में विद्यालय के बच्चों के यूनिफॉर्म में नियमित आने की स्थिति में भी सुधार हुआ।

शिक्षा के जरिए सामाजिक दूरी कम करने की कोशिश

बिदायडीह गांव में शिक्षा के साथ सामाजिक समरसता को मजबूत करना भी उनके काम का अहम हिस्सा रहा। उन्होंने अलग-अलग समुदायों के परिवारों के बीच संवाद बढ़ाने और बच्चों को साथ पढ़ने-खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।

उनके प्रयासों से गांव के सामाजिक माहौल में सकारात्मक बदलाव आने की बात सामने आई है। स्कूल परिसर में अलग-अलग समुदायों के बच्चों के बीच मेलजोल इसका उदाहरण बताया गया है।

बच्चों के लिए पढ़ाई को बनाया रोचक

खुशबू कुमारी ने प्राथमिक कक्षाओं में सीखने की प्रक्रिया को बच्चों के लिए आसान और रुचिकर बनाने पर जोर दिया। बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को मजबूत करने के लिए उन्होंने कम लागत वाली शिक्षण सामग्री और गतिविधि आधारित तरीकों का इस्तेमाल किया।

उनका ‘मात्रा का ज्ञान हुआ आसान’ नवाचार भी चर्चा में रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री की ओर से इसकी सराहना किए जाने के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।

इससे पहले कटोरिया के कठौन स्कूल में भी उन्होंने ‘चहक’ योजना के तहत गीत और संगीत के जरिए बच्चों को पढ़ाने की पद्धति अपनाई थी।

बाल संसद और इको क्लब से बच्चों में नेतृत्व की सीख

विद्यालय में उन्होंने बाल संसद और इको क्लब की शुरुआत की। इसका उद्देश्य बच्चों में नेतृत्व क्षमता के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

इसके अलावा माहवारी स्वच्छता, बाल सुरक्षा और ‘गुड टच-बैड टच’ जैसे विषयों पर भी बच्चों और समुदाय के बीच जागरूकता गतिविधियां चलाई गईं।

बच्चों ने छात्रवृत्ति परीक्षाओं में भी दिखाई क्षमता

शिक्षा के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ने का असर उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में भी देखने को मिला। बिदायडीह जैसे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी अब राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति जैसी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल कर रहे हैं।

खुशबू कुमारी की शिक्षण पद्धति डिजिटल माध्यमों के जरिए दूसरे शिक्षकों और अभिभावकों तक भी पहुंच रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी नवोन्मेषी शिक्षण तकनीक से देशभर के आठ लाख से अधिक शिक्षक और अभिभावक जुड़े हैं।

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