नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने व्यापारियों के लिए चीनी रखने की अधिकतम मात्रा और भंडारण अवधि दोनों को सीमित कर दिया है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक व्यापारियों के लिए चीनी की अधिकतम स्टॉक सीमा 1,000 क्विंटल रहेगी।
15 दिन से अधिक चीनी रखने पर रोक
नए प्रावधान के तहत कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम को छोड़कर देश के अन्य हिस्सों में व्यापारियों को चीनी का स्टॉक अधिकतम 15 दिनों तक रखने की अनुमति होगी।
इसका मतलब है कि कारोबारी लंबे समय तक बड़ी मात्रा में चीनी रोककर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा नहीं कर सकेंगे।
कुछ महीनों में लगातार घटाई गई स्टॉक लिमिट
चीनी की जमाखोरी पर नियंत्रण के लिए सरकार पहले भी स्टॉक सीमा में बदलाव करती रही है। हाल के महीनों में अधिकतम सीमा इस तरह कम की गई है:
| अवधि | अधिकतम स्टॉक सीमा |
|---|---|
| अगस्त 2026 | 4,000 क्विंटल |
| 15 सितंबर 2026 | 2,000 क्विंटल |
| 15 अक्टूबर से 30 नवंबर | 1,000 क्विंटल |
इस तरह कुछ ही महीनों में व्यापारियों के लिए अनुमत स्टॉक सीमा आधी से भी कम कर दी गई है।
त्योहारों में सप्लाई बनाए रखने पर जोर
त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में मांग बढ़ने का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर स्टॉक रोकने से बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
सरकार का यह कदम बाजार में चीनी की नियमित आपूर्ति बनाए रखने और अचानक कीमत बढ़ने की स्थिति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ग्राहकों को क्या फायदा होने की उम्मीद?
स्टॉक सीमा कम होने से चीनी का बाजार में प्रवाह बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे त्योहारी मांग के दौरान जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने की कोशिश होगी।
आम उपभोक्ताओं के लिए इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि त्योहारों के दौरान चीनी की उपलब्धता बनी रहे और मांग बढ़ने के बावजूद कीमतों में अचानक उछाल की संभावना कम हो।
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