Monday, September 14, 2026

प्रीमियम ट्रेनों की देरी से यात्री परेशान, खाली सीटों से 30 लाख के संभावित राजस्व का अनुमान.

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जमशेदपुर: पुणे से झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर आने वाली प्रीमियम ट्रेनों की लगातार देरी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है। अधिक किराया चुकाने के बावजूद समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचने की स्थिति से यात्रियों में असंतोष देखा जा रहा है। वहीं, दो ट्रेनों में उपलब्ध खाली सीटों और निर्धारित किराये के आधार पर एक दिन में करीब 30 लाख रुपये के संभावित राजस्व का अनुमान सामने आया है।

हालांकि, यह राशि रेलवे की ओर से घोषित आधिकारिक नुकसान नहीं है। यह खाली सीटों की संख्या और संबंधित श्रेणी के किराये को आधार बनाकर किया गया अनुमान है।

दुरंतो में 546 सीटें खाली होने का दावा

पुणे-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस (12221) में 3ए की 443, 2ए की 100 और 1ए की 3 सीटें उपलब्ध बताई गई हैं। इन सीटों के किराये के आधार पर करीब 23.52 लाख रुपये की संभावित आय का अनुमान लगाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रेन की बीते सात दिनों की औसत देरी करीब 4 घंटे 57 मिनट रही। इसमें 3ए का किराया 4,030 रुपये, 2ए का 5,465 रुपये और 1ए का 6,795 रुपये बताया गया है।

हमसफर एक्सप्रेस की स्थिति भी चिंताजनक

पुणे-संतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस (20821) में 3ए की 263 सीटें खाली बताई गई हैं। इन सीटों के किराये के आधार पर करीब 6.50 लाख रुपये की संभावित आय का अनुमान लगाया गया है।

इस ट्रेन की पिछले सात दिनों की औसत देरी करीब 26 घंटे 58 मिनट बताई गई है। सोमवार को भी ट्रेन को करीब 8 घंटे 5 मिनट री-शेड्यूल किए जाने की जानकारी सामने आई।

दोनों ट्रेनों के आंकड़ों को जोड़ने पर संभावित राजस्व का अनुमान करीब 30 लाख रुपये बैठता है। यह गणना केवल उपलब्ध सीटों और किराये पर आधारित है और इसे रेलवे का वास्तविक या आधिकारिक वित्तीय नुकसान नहीं माना जा सकता।

बिलासपुर-झारसुगुड़ा-टाटानगर सेक्शन पर उठ रहे सवाल

पुणे और मुंबई से हावड़ा की ओर चलने वाली ट्रेनों में देरी का असर झारखंड पहुंचने वाले यात्रियों पर भी पड़ता है। खासकर बिलासपुर–झारसुगुड़ा–टाटानगर–खड़गपुर रेलखंड में ट्रेनों के समय से संचालन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

प्रीमियम और डायनेमिक किराये वाली ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की अपेक्षा रहती है कि उन्हें बेहतर समयबद्ध सेवा मिले। कई घंटे की देरी या यात्रा शुरू होने से पहले ट्रेन के री-शेड्यूल होने पर यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है।

रेल यूजर्स एसोसिएशन ने परिचालन सुधार की मांग की

Jharkhand Rail Users Association का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की लगातार देरी का असर केवल यात्रियों पर नहीं पड़ता, बल्कि इससे रेलवे की संभावित कमाई भी प्रभावित हो सकती है। संगठन ने रेलवे से पुणे-मुंबई से हावड़ा रूट पर समयबद्धता सुधारने की मांग की है।

एसोसिएशन के अनुसार, विशेष रूप से बिलासपुर–झारसुगुड़ा–टाटानगर–खड़गपुर सेक्शन में परिचालन व्यवस्था को बेहतर करने की जरूरत है। साथ ही प्रीमियम ट्रेनों को उनके किराये और सेवा स्तर के अनुरूप परिचालन में प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई है।

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