Thursday, September 10, 2026

Bihar Liquor Ban: 20 हजार करोड़ के राजस्व नुकसान के बावजूद शराबबंदी नहीं हटेगी, CM सम्राट चौधरी ने बताया कारण.

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बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से राज्य को हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद इस नीति में बदलाव नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं के सम्मान और सामाजिक हित से जुड़ा फैसला बताया।

पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समाचार एजेंसी ANI के साथ बातचीत में बिहार की शराबबंदी समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी आगे भी प्रभावी रहेगी और सरकार इसके साथ किसी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।

उनके मुताबिक, शराब से मिलने वाला राजस्व छोड़ने के बावजूद सरकार इस नीति को जारी रखे हुए है, क्योंकि इसका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ-हानि तक सीमित नहीं है।

महिलाओं से जुड़े मुद्दे को बताया प्रमुख वजह

सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी की शुरुआत महिलाओं की मांग और आग्रह के बाद की गई थी। उनके अनुसार, इस फैसले को महिलाओं के सम्मान और परिवारों पर पड़ने वाले सामाजिक प्रभाव से जोड़कर देखा गया था।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार शराबबंदी को सिर्फ राजस्व के नजरिये से नहीं देखती। इसलिए शराब से होने वाली संभावित आय के नुकसान के बावजूद नीति को जारी रखने का फैसला किया गया है।

हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान

मुख्यमंत्री के अनुसार, शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार सरकार को शराब से मिलने वाले राजस्व से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने अनुमान जताया कि राज्य को हर वर्ष लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।

हालांकि, सरकार का कहना है कि शराबबंदी का फैसला सामाजिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है और आर्थिक नुकसान इसके रास्ते में बाधा नहीं बनेगा।

नीतीश कुमार के साथ रिश्ते पर भी बोले

इंटरव्यू के दौरान सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपने राजनीतिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह करीब तीन दशक से नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे हैं और उन्हें पिता के समान मानते हैं।

भाजपा में भविष्य के नेतृत्व से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है। उन्होंने इसे पार्टी के आंतरिक निर्णय का विषय बताया।

2030 तक पलायन रोकने का लक्ष्य

बिहार से युवाओं के पलायन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2030 से पहले राज्य से पलायन की समस्या पर काफी हद तक रोक लगा दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार में शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि युवाओं को काम और पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की जरूरत कम पड़े।

बाढ़ से निपटने के लिए हाईलेवल डैम की तैयारी

मुख्यमंत्री ने बिहार की बाढ़ समस्या पर भी सरकार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण राज्य के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनती है।

उनके मुताबिक, हाईलेवल डैम के निर्माण से संबंधित DPR को लेकर सहमति बन चुकी है। दूसरी ओर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई की व्यवस्था भी की गई है।

फरक्का बराज को लेकर बिहार की मांग

फरक्का बराज के मुद्दे पर भी सम्राट चौधरी ने अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने की समस्या बढ़ी है, जिसका असर नदी के स्वरूप और चौड़ाई पर पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, गंगा की चौड़ाई बक्सर में करीब 4 किलोमीटर, पटना में 11 किलोमीटर, बेगूसराय में 17 किलोमीटर और भागलपुर में लगभग 26 किलोमीटर तक बताई जाती है।

उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि के संदर्भ में बिहार की मांग है कि राज्य को पीने के पानी, कृषि और औद्योगिक जरूरतों के लिए आवश्यकता के मुताबिक पानी लेने का अधिकार मिलना चाहिए। इस विषय को केंद्र सरकार के सामने भी उठाया गया है।

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