रांची: राजधानी रांची के जिला स्कूल में आयोजित 53वीं राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में झारखंड के 24 जिलों से आए विद्यार्थियों ने अपने वैज्ञानिक प्रयोगों और नवाचारों का प्रदर्शन किया। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड और एनसीईआरटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की थीम ‘S.T.E.M. for Viksit and Atmanirbhar Bharat’ रखी गई थी।
प्रदर्शनी में छात्रों ने ऐसे मॉडल पेश किए, जिनका संबंध सीधे समाज और आम लोगों की जरूरतों से है। सड़क हादसों को कम करने की तकनीक से लेकर स्मार्ट खेती, महिला स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स तक कई विषयों पर विद्यार्थियों ने अपने आइडिया सामने रखे।
सड़क हादसों को रोकने के लिए तैयार किया स्मार्ट सिस्टम
चतरा के प्लस टू जनता उच्च विद्यालय के छात्र रोशन प्रसाद कुशवाहा ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम पर आधारित ‘क्रैश इंपैक्ट डिफेंडर’ मॉडल बनाया। इसमें रडार और जीपीएस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
छात्र के मुताबिक, सिस्टम सड़क के मोड़, घाटी और दूसरे संवेदनशील स्थानों पर आसपास मौजूद वाहनों का पता लगाने में मदद कर सकता है। संभावित खतरे की स्थिति में चालक को अलर्ट करने की व्यवस्था भी मॉडल में दिखाई गई। दुर्घटना होने पर संबंधित जानकारी आसपास के वाहनों और पुलिस तक पहुंचाने की अवधारणा इसमें शामिल की गई है।
रोशन के अनुसार, बड़े वाहनों में इस तरह की तकनीक लगाने की अनुमानित लागत करीब 10 से 12 हजार रुपये हो सकती है।
स्मार्ट खेती के जरिए पानी और खाद की बचत
पलामू के डाल्टनगंज स्थित ग्रीन वेल इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं अंजलि और सृष्टि ने ‘सेल्फ सस्टेनेबल एग्रीकल्चर IoT फार्म’ मॉडल प्रदर्शित किया।
यह मॉडल एक्वापोनिक्स तकनीक पर आधारित है। इसमें मछलियों से निकलने वाले अपशिष्ट को पौधों के लिए उपयोगी पोषक तत्वों में बदलने की अवधारणा दिखाई गई है। इससे रासायनिक खाद की जरूरत कम करने और पानी के बेहतर इस्तेमाल की संभावना बताई गई।
मॉडल में NodeMCU आधारित सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिसके माध्यम से तापमान, नमी और पानी के pH स्तर जैसी जानकारियों की निगरानी मोबाइल फोन से करने की व्यवस्था दिखाई गई।
मासिक धर्म स्वच्छता पर छात्राओं ने दिया संदेश
कोडरमा के झुमरी तिलैया की कक्षा 12 की छात्रा ने महिला स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता पर केंद्रित प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। इसमें स्कूलों में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए वेंडिंग मशीन और इस्तेमाल किए गए उत्पादों के सुरक्षित निपटान जैसे मुद्दों को शामिल किया गया।
प्रोजेक्ट में किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान उपलब्ध विभिन्न स्वच्छता विकल्पों के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
मोबाइल से चलने वाली स्मार्ट कार ने खींचा ध्यान
सिमडेगा के राजकीय उत्कर्ष उच्च विद्यालय के कक्षा 9 के छात्र संजय ने ‘ब्लूटूथ कंट्रोल्ड स्मार्ट कार’ तैयार की। मोबाइल फोन के जरिए संचालित इस मॉडल में हेडलाइट, इंडिकेटर और अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाए गए हैं।
मॉडल की खासियत यह है कि सामने किसी बाधा का पता चलने पर सेंसर कार को रोकने में मदद कर सकता है। इससे विद्यार्थियों ने ऑटोमेशन और सेंसर तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल को प्रदर्शित किया।
साइबर सुरक्षा के लिए ऐप का मॉडल
चतरा के कक्षा 11 के एक छात्र ने साइबर सुरक्षा से संबंधित ‘क्वांटम शील्ड’ नाम का ऐप प्रस्तुत किया। छात्र के अनुसार, ऐप मोबाइल में मौजूद संदिग्ध या छिपे हुए मैलवेयर की पहचान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
प्रोजेक्ट में AI आधारित सहायक, नियमित सुरक्षा सुझाव और साइबर अपराध की शिकायत करने की सुविधा जैसी अवधारणाएं भी शामिल की गई हैं। छात्र ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मोबाइल यूजर्स को जागरूक करने की जरूरत पर जोर दिया।
विज्ञान को सामाजिक समस्याओं से जोड़ने की कोशिश
प्रदर्शनी में प्रस्तुत मॉडलों की खास बात यह रही कि ज्यादातर प्रोजेक्ट सिर्फ तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं रहे। विद्यार्थियों ने सड़क सुरक्षा, खेती, स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा जैसी वास्तविक चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपने समाधान तैयार किए।
कार्यक्रम में शामिल मॉडलों ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और तकनीकी समझ को सामने रखा। आयोजकों का उद्देश्य भी छात्रों में प्रयोग, नवाचार और समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ावा देना रहा।
