देवघर: जिले के निबंधन कार्यालय में स्थायी रजिस्ट्रार की कमी का असर जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री से जुड़े कामकाज पर पड़ता नजर आ रहा है। करीब पांच वर्षों से स्थायी रजिस्ट्रार नहीं होने के कारण कार्यालय अतिरिक्त प्रभार के भरोसे संचालित हो रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले 18 दिनों में यहां एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई है।
अतिरिक्त प्रभार से चल रहा कार्यालय
देवघर निबंधन कार्यालय में स्थायी अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों के पास पहले से अपने विभागीय दायित्व होने के कारण निबंधन कार्यालय के कामकाज के लिए नियमित समय देना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इसका असर दस्तावेजों के निष्पादन और आम लोगों की सेवाओं पर दिखाई दे रहा है।
जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए लोगों को इंतजार
निबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से जमीन या फ्लैट की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्री के अलावा एनओसी और भूमि से जुड़े अन्य दस्तावेजों के लिए भी लोगों को बार-बार कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है।
अपनी जमीन से संबंधित एनओसी के लिए कार्यालय पहुंचे बीएन झा ने बताया कि उन्हें कई दिनों से कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अधिकारी के उपलब्ध नहीं होने की वजह से उनका काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी एनओसी के लिए दोबारा कार्यालय आना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट में लंबित है मामला
वर्तमान में देवघर निबंधन कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार अपर समाहर्ता हीरा कुमार के पास है। उनके अनुसार, कर्मचारियों की कमी के अलावा हाईकोर्ट में लंबित एक मामले के कारण भी निबंधन कार्यालय के कुछ कार्य प्रभावित हैं।
बताया गया है कि देवघर में जमीन की रजिस्ट्री, लैंड पोजीशन सर्टिफिकेट (LPC) और भूमि से जुड़े अन्य कार्यों में पूर्व में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर मामला अदालत में लंबित है। इसी के चलते प्रशासन की ओर से कुछ कार्यों का निष्पादन फिलहाल सीमित रखा गया है।
स्थायी रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए पत्र
जिला प्रशासन ने समस्या के समाधान के लिए निबंधन विभाग के महानिरीक्षक को पत्र भेजकर देवघर में स्थायी रजिस्ट्रार की नियुक्ति का अनुरोध किया है। अपर समाहर्ता हीरा कुमार ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही स्थायी अधिकारी की नियुक्ति हो सकती है। उनके अनुसार, नियमित रजिस्ट्रार के आने के बाद कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार होने की संभावना है।
हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व
जमीन और संपत्ति के निबंधन से सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, देवघर जिले से निबंधन के जरिए सालाना करीब 50 से 60 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। ऐसे में लंबे समय तक रजिस्ट्री प्रक्रिया प्रभावित रहने से सरकारी आय पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं, संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया में देरी आर्थिक और व्यावहारिक परेशानियां बढ़ा सकती है।
स्थायी नियुक्ति पर टिकी उम्मीद
देवघर में जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए निबंधन कार्यालय में स्थायी अधिकारी की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से नियुक्ति के लिए पत्र भेजे जाने के बाद अब लोगों को स्थायी समाधान का इंतजार है। स्थायी रजिस्ट्रार की नियुक्ति होने पर रजिस्ट्री और अन्य निबंधन संबंधी कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
