Sunday, August 16, 2026

2047 तक मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बड़ी छलांग की तैयारी, नीति आयोग ने बताए 12 प्रमुख सेक्टर.

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नई दिल्ली: भारत को 2047 तक दुनिया के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में शामिल करने के लिए किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए, इसे लेकर नीति आयोग और क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में व्यापक रणनीति सामने रखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े पैमाने पर उत्पादन, आधुनिक तकनीक, प्रतिस्पर्धी कीमत और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत भागीदारी भारत की औद्योगिक महत्वाकांक्षा को गति दे सकती है।

भारत की अर्थव्यवस्था को 2047 तक करीब 30 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचाने में मैन्युफैक्चरिंग की भूमिका अहम मानी जा रही है। फिलहाल देश के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 17.5 फीसदी बताई गई है।

12 सेक्टरों पर रहेगा खास फोकस

नीति आयोग और क्रिसिल इंटेलिजेंस ने 62 औद्योगिक क्षेत्रों के आकलन के बाद 12 ऐसे सेक्टर चिन्हित किए हैं, जिनमें भारत के लिए वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति बनाने की संभावनाएं हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • ऑटोमोबाइल
  • केमिकल
  • कैपिटल गुड्स
  • इलेक्ट्रॉनिक्स
  • फार्मास्यूटिकल्स
  • डिफेंस और ड्रोन
  • फूड प्रोसेसिंग
  • टेक्सटाइल
  • स्टील
  • लेदर और फुटवियर
  • टेलीकॉम उपकरण
  • सोलर पीवी

चीन से बढ़त लेने का मौका

रिपोर्ट में वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में भारत और चीन की हिस्सेदारी की तुलना भी की गई है। आंकड़ों के मुताबिक 1995 से 2023 के बीच वैश्विक विनिर्माण में चीन की हिस्सेदारी लगभग 5 फीसदी से बढ़कर 32 फीसदी के करीब पहुंच गई, जबकि भारत की हिस्सेदारी करीब 1.5 फीसदी से बढ़कर 3.2 फीसदी हुई।

चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही वैश्विक कंपनियों के बीच भारत के पास अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत करने का अवसर है।

केमिकल उद्योग में बड़ी संभावनाएं

रिपोर्ट के मुताबिक केमिकल सेक्टर भारत के लिए प्रमुख ग्रोथ एरिया बन सकता है। बड़े बाजार, रिसर्च क्षमता और वैश्विक कंपनियों की बदलती रणनीति से भारतीय उद्योग को फायदा मिलने की संभावना है।

2025 में भारतीय केमिकल बाजार का आकार करीब 200-220 अरब डॉलर आंका गया है। अनुमान है कि 2030 तक घरेलू खपत बढ़कर लगभग 290-310 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

टेक्सटाइल सेक्टर से रोजगार को सहारा

टेक्सटाइल और परिधान उद्योग भारत के बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र से करीब 4.5 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी है। देश के GDP में इसका योगदान लगभग 2 फीसदी और कुल निर्यात में हिस्सेदारी करीब 9 फीसदी है।

2025 में भारत का टेक्सटाइल और परिधान निर्यात लगभग 37.7 अरब डॉलर रहा। इससे देश दुनिया के प्रमुख कपड़ा निर्यातकों में अपनी स्थिति बनाए हुए है।

टेलीकॉम और 5G उपकरणों में अवसर

भारत दुनिया के बड़े टेलीकॉम बाजारों में शामिल है और यहां 120 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। इंटरनेट की व्यापक पहुंच और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ 5G तथा दूसरे टेलीकॉम उपकरणों के निर्माण में भी अवसर बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू मांग और डिजिटल नेटवर्क के विस्तार का लाभ उठाकर भारत इस क्षेत्र में वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

सोलर मैन्युफैक्चरिंग में तेजी

रिन्यूएबल एनर्जी और सोलर उपकरणों के निर्माण में भी भारत ने पिछले कुछ वर्षों में तेज विस्तार किया है। सोलर मॉड्यूल की घरेलू विनिर्माण क्षमता 2014 के करीब 2.3 GW से बढ़कर अगस्त 2025 तक लगभग 100 GW बताई गई है। इसी अवधि में सोलर सेल की क्षमता करीब 1.2 GW से बढ़कर 25 GW तक पहुंची।

ऊर्जा संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों के चलते सोलर मैन्युफैक्चरिंग में आने वाले वर्षों में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।

निर्यात में मैन्युफैक्चरिंग की अहम भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार भारत के निर्यात में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी है। पेट्रोलियम उत्पाद, हीरा-ज्वेलरी और फार्मास्यूटिकल्स देश के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल हैं।

पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात मूल्य 2017 के करीब 31.1 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में लगभग 62.6 अरब डॉलर बताया गया है। वहीं हीरा और आभूषण तथा दवाइयां भी भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लिए क्या करना होगा?

रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को तकनीकी क्षमता, उत्पादकता, गुणवत्ता और लागत के मोर्चे पर भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होना होगा।

इसके लिए सेक्टर के हिसाब से नीतियां बनाने, आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और कुशल मानव संसाधन तैयार करने की जरूरत बताई गई है।

सरकार और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी

मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय को भी अहम माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों को समझकर नीतियां तैयार करने, तकनीकी प्रशिक्षण बढ़ाने और निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने से भारत अपनी औद्योगिक क्षमता को अगले स्तर तक ले जा सकता है।

यदि इन क्षेत्रों में लगातार निवेश और नीतिगत सुधार किए जाते हैं, तो 2047 तक भारत की वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में हिस्सेदारी बढ़ाने की मजबूत संभावना बन सकती है।

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