रांची: झारखंड में जीएसटी व्यवस्था को और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद झारखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू कर दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत सरकार कुछ निर्धारित वस्तुओं के लिए ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम लागू कर सकेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वस्तुओं की सप्लाई चेन पर डिजिटल नजर रखना है। इसके माध्यम से किसी निर्धारित वस्तु के उत्पादन से लेकर उसके अंतिम स्तर पर बिक्री तक की जानकारी को ट्रैक करना संभव होगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग और बिना बिल के कारोबार जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत होगा।
सामान पर लगाया जा सकता है यूनिक डिजिटल पहचान चिह्न
नए प्रावधानों के अनुसार, सरकार अधिसूचना जारी कर किसी खास वस्तु या उसकी पैकेजिंग पर विशिष्ट पहचान चिह्न लगाना अनिवार्य कर सकती है। यह पहचान डिजिटल स्टांप अथवा किसी अन्य सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के रूप में हो सकती है।
एक बार पहचान चिह्न लगाए जाने के बाद उसे हटाने या उसमें बदलाव करने की अनुमति नहीं होगी। इससे विभाग को संबंधित वस्तु की सप्लाई चेन की जानकारी डिजिटल माध्यम से हासिल करने में मदद मिलेगी।
मसलन, किसी वस्तु का निर्माण किस स्थान पर हुआ, वह किस कारोबारी या आपूर्तिकर्ता तक पहुंची और आगे उसकी बिक्री कहां हुई—इस तरह की जानकारी को ट्रैक करने की व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी पर निगरानी होगी मजबूत
ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है। डिजिटल पहचान के जरिये वस्तुओं की आवाजाही पर नजर रखे जाने से विभाग को संदिग्ध लेनदेन और सप्लाई चेन में होने वाली गड़बड़ियों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
इससे बिना बिल सामान बेचने, फर्जी इनवॉयस तैयार करने और कर देनदारी से बचने जैसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।
GST कानून में कई अन्य बदलाव भी
संशोधन अध्यादेश में जीएसटी कानून से जुड़े कई अन्य प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। इनमें प्लांट और मशीनरी से संबंधित शब्दावली में संशोधन शामिल है। इस बदलाव को 1 जुलाई 2017 से प्रभावी माना गया है।
इसके अलावा विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी SEZ और फ्री ट्रेड वेयरहाउसिंग जोन से जुड़े माल की आपूर्ति के नियमों में भी संशोधन किया गया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से राज्य के जीएसटी कानून को केंद्रीय जीएसटी व्यवस्था के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।
केवल जुर्माने वाले मामलों में अपील से पहले 10% जमा करना होगा
अध्यादेश में जीएसटी मामलों की अपील प्रक्रिया से संबंधित प्रावधान भी बदले गए हैं। यदि किसी मामले में आदेश के तहत केवल जुर्माना लगाया गया है और कोई कर मांग निर्धारित नहीं की गई है, तो अपील दाखिल करने से पहले संबंधित जुर्माने की 10 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर कम से कम 1 लाख रुपये का जुर्माना
ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम से संबंधित नियमों का पालन नहीं करने पर कारोबारियों को आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। उल्लंघन की स्थिति में 1 लाख रुपये या देय कर की 10 प्रतिशत राशि, इनमें से जो अधिक होगी, उतना जुर्माना लगाया जा सकेगा।
नए ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम को ऐसे समझें
- सरकार निर्धारित वस्तुओं के लिए डिजिटल पहचान व्यवस्था लागू कर सकेगी।
- वस्तु या उसकी पैकेजिंग पर यूनिक पहचान चिह्न लगाया जा सकता है।
- उत्पादन से बिक्री तक सप्लाई चेन की जानकारी ट्रैक करने में मदद मिलेगी।
- फर्जी बिलिंग और बिना बिल के कारोबार पर निगरानी बढ़ सकती है।
- नियमों का उल्लंघन होने पर 1 लाख रुपये या देय कर के 10 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, उसके बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है।
नए प्रावधानों के लागू होने के बाद झारखंड में जीएसटी प्रशासन के डिजिटल स्वरूप को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किन-किन वस्तुओं पर ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू होगी और उसकी व्यावहारिक प्रक्रिया क्या होगी, यह संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं के माध्यम से स्पष्ट किया जाएगा।
