नई दिल्ली: बारिश का मौसम जहां एक ओर सुहावना लगता है, वहीं दूसरी तरफ यह सेहत के लिए कई चुनौतियां भी लेकर आता है। मानसून के दौरान नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिसका सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है। इस मौसम में कई लोगों को गैस, एसिडिटी, पेट फूलना, अपच और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
वडोदरा के भाईलाल अमीन जनरल हॉस्पिटल के कंसल्टेंट GI, HPB और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. हर्षिल एस. शाह के मुताबिक, मानसून में पेट से जुड़ी परेशानियों के पीछे सिर्फ खान-पान ही जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि मौसम में बदलाव भी शरीर के पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।
मानसून में क्यों बढ़ जाती हैं पेट की समस्याएं?
डॉ. शाह बताते हैं कि बारिश के मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म और पाचन प्रक्रिया थोड़ी धीमी हो सकती है। इसके कारण खाना खाने के बाद भारीपन, गैस, पेट फूलना और भूख कम लगने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
इस मौसम में लोग अक्सर घर के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। वहीं, चाय-पकौड़े और तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ने से भी पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
पेट की सेहत का इम्यूनिटी से है सीधा संबंध
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का बड़ा हिस्सा पाचन तंत्र से जुड़ा होता है। आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर को हानिकारक सूक्ष्मजीवों से बचाने में मदद करते हैं।
लेकिन खराब खान-पान, तनाव, नींद की कमी और बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल से आंतों में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचें
मानसून के दौरान होने वाले कई पेट के संक्रमण वायरस की वजह से होते हैं, जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेने से शरीर के फायदेमंद बैक्टीरिया प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल संक्रमण के कई मामलों में पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और संतुलित आहार लेना ही काफी होता है।
रसोई की साफ-सफाई भी जरूरी
मानसून में खाने की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कच्चे और पके हुए भोजन को अलग रखना जरूरी है। एक ही चाकू या कटिंग बोर्ड का इस्तेमाल अलग-अलग चीजों के लिए करने से हानिकारक बैक्टीरिया फैल सकते हैं।
खाना बनाने और खाने से पहले हाथ धोना, भोजन को ढककर रखना और साफ पानी का इस्तेमाल करना पेट के संक्रमण से बचने में मदद करता है।
हेपेटाइटिस A और E का भी रहता है खतरा
बारिश के मौसम में पेट की हर समस्या फूड पॉइजनिंग की वजह से नहीं होती। दूषित पानी और भोजन से हेपेटाइटिस A और E का संक्रमण भी हो सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों में जी मिचलाना, उल्टी, कमजोरी और थकान शामिल हो सकते हैं।
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बुखार जैसी समस्या भी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को मानसून में विशेष सतर्क रहना चाहिए। ऐसे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
अगर पेशाब कम आना, चक्कर आना या अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्या महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
मानसून में गट हेल्थ बेहतर रखने के उपाय
- खाना हमेशा ढककर रखें और लंबे समय तक खुला भोजन खाने से बचें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- समय पर भोजन करें और हल्का व संतुलित आहार लें।
- तले-भुने और बहुत मसालेदार भोजन का सेवन सीमित करें।
- बीमारी से ठीक होने के बाद हल्का भोजन लें, जैसे उबले चावल, केला और पर्याप्त तरल पदार्थ।
- नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
बारिश के मौसम में थोड़ी सावधानी और सही खान-पान अपनाकर पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है और मानसून का आनंद बेहतर तरीके से लिया जा सकता है।
