Sunday, May 17, 2026

8वें वेतन आयोग के परामर्श में कर्मचारी संगठनों ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की मांग तेज की.

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए इस समय आठवां वेतन आयोग सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित आठवें वेतन आयोग की परामर्श प्रक्रिया इन दिनों तेजी से आगे बढ़ रही है. इस बीच, विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी संघ (AINPSEF) ने सरकार के सामने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी मांग रख दी है. रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि लगातार बढ़ रही जीवन यापन की लागत को देखते हुए अब वर्तमान महंगाई भत्ते (DA) को सीधे तौर पर बेसिक सैलरी में शामिल (Merge) कर दिया जाना चाहिए.

क्यों उठ रही है DA मर्जर की मांग?
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है. वर्तमान समय में केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 60 फीसदी के स्तर को छू चुका है. यूनियनों का मानना है कि महंगाई का यह बढ़ा हुआ स्तर अब अस्थायी नहीं रहा, बल्कि यह स्थायी रूप से जीवन यापन की लागत का हिस्सा बन चुका है. इसलिए इसे अलग से भत्ते के रूप में देने के बजाय संशोधित सैलरी स्ट्रक्चर की बेसिक सैलरी में मर्ज कर देना चाहिए.

कर्मचारियों और पेंशन भोगियों पर क्या होगा असर?
यदि आठवां वेतन आयोग इस मांग को स्वीकार करता है, तो देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव आएगा:

टेक-होम सैलरी में बंपर उछाल
मूल वेतन में महंगाई भत्ते के जुड़ते ही कर्मचारियों की बेसिक सैलरी का ग्राफ काफी ऊंचा हो जाएगा, जिससे हर महीने हाथ में आने वाला वेतन (In-hand Salary) काफी बढ़ जाएगा.

अन्य भत्तों में भारी वृद्धि
हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और मेडिकल अलाउंस जैसे कई महत्वपूर्ण भत्ते सीधे बेसिक सैलरी के प्रतिशत पर निर्भर करते हैं. बेसिक बढ़ते ही ये सारे भत्ते स्वतः ही बढ़ जाएंगे.

रिटायरमेंट बेनिफिट्स और पेंशन में लाभ
कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और भविष्य निधि (PF/NPS) का योगदान भी अंतिम बेसिक सैलरी के आधार पर तय होता है. इस मर्जर से रिटायरमेंट पर मिलने वाला फंड और बुजुर्गों की मासिक पेंशन काफी मजबूत हो जाएगी.

हालांकि, सरकार ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और आठवें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वेतन का नया स्वरूप तय होगा.

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