रांची: 77वें वन महोत्सव के अवसर पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का आह्वान किया। खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह में उन्होंने लोगों से कम से कम एक फलदार पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की। इस अवसर पर विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं।
पर्यावरण की सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव का असर अब सीधे लोगों के जीवन पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि जंगलों के घटते क्षेत्र और प्राकृतिक आवासों में बढ़ते हस्तक्षेप के कारण जंगली जानवर, विशेषकर हाथी, आबादी वाले इलाकों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। यह प्रकृति के असंतुलन का स्पष्ट संकेत है।
फलदार और स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पौधारोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे पौधे लगाए जाने चाहिए जिनका लाभ समाज, पर्यावरण और वन्यजीवों को भी मिले। उन्होंने महुआ, जामुन, करंज समेत अन्य स्थानीय और फलदार वृक्षों के रोपण को बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना था कि यदि हर व्यक्ति एक उपयोगी पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो पूरे राज्य में हरित क्रांति का वातावरण तैयार किया जा सकता है।
वन महोत्सव में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता वन समितियों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी), ग्राम वन प्रबंधन समितियों के प्रतिनिधियों तथा “हाथी मित्रों” को सम्मानित किया। इसके साथ ही उन्होंने स्वयं भी पौधारोपण कर वन महोत्सव की शुरुआत की।
बढ़ते शहरीकरण पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पेड़ों की कटाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कंक्रीट के विस्तार का असर जलवायु और जैव विविधता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
नकली खाद्य पदार्थों का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने हाल ही में रांची में नकली पनीर बरामद होने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण और असंतुलित विकास के कारण कृत्रिम एवं मिलावटी उत्पादों का चलन बढ़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
हरित झारखंड के निर्माण का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पहले भी अधिक पौधारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजनाओं पर विचार कर चुकी है। उन्होंने लोगों से वन महोत्सव को केवल औपचारिक आयोजन न मानकर इसे जन आंदोलन का रूप देने की अपील की। उनका कहना था कि यदि प्रत्येक परिवार एक पौधा लगाकर उसे संरक्षित रखे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और हरित झारखंड का निर्माण संभव होगा।
