Monday, October 12, 2026

3,590 करोड़ रुपये से बनेगी 82.5 किमी फोरलेन सड़क, पटना से नेपाल जाना होगा आसान.

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पटना, बिहार | 12 अक्टूबर 2026

बिहार से नेपाल जाने वाले यात्रियों और कारोबारियों के लिए अच्छी खबर है। मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा तक जाने वाली सड़क को फोरलेन में विकसित करने की योजना पर काम आगे बढ़ रहा है। लगभग 82.578 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 3,590.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

सड़क चौड़ी होने से उत्तर बिहार और भारत-नेपाल सीमा के बीच आवागमन सुगम होने की उम्मीद है। इससे पटना से नेपाल जाने वाले यात्रियों, मालवाहक वाहनों और व्यापारियों को भी फायदा मिल सकता है। परियोजना पूरी होने पर सड़क संपर्क बेहतर होने के साथ क्षेत्र में उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

82.5 किलोमीटर लंबी सड़क पर खर्च होंगे 3,590 करोड़ रुपये

मुजफ्फरपुर-सोनबरसा सड़क परियोजना के तहत मौजूदा दो लेन की सड़क को चार लेन में विकसित किया जाना है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिली थी।

इस सड़क का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है। इसे 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति को ध्यान में रखकर तैयार करने की योजना है।

सड़क के बीच बने डिवाइडर में अनियंत्रित क्रॉसिंग को रोकने जैसे सुरक्षा प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। इससे यातायात को व्यवस्थित करने और दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

सात बड़े पुल और तीन रेलवे ओवरब्रिज बनेंगे

फोरलेन सड़क परियोजना में कई महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण प्रस्तावित है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत सात प्रमुख पुल और तीन रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाए जाएंगे।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सात प्रमुख पुल: इनमें बागमती नदी पर प्रस्तावित 340 मीटर लंबा पुल भी शामिल है।
  • तीन रेलवे ओवरब्रिज: रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
  • दो बड़े फ्लाईओवर: रिपोर्ट में 1,170 मीटर और 270 मीटर लंबे फ्लाईओवर का उल्लेख है।

इन निर्माण कार्यों से व्यस्त इलाकों में जाम कम करने और वाहनों की आवाजाही आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सोनबरसा से नेपाल सीमा तक मजबूत होगी कनेक्टिविटी

मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन सड़क उत्तर बिहार के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सोनबरसा के रास्ते भारत-नेपाल सीमा तक पहुंच आसान होने के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-27 यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से संपर्क भी बेहतर होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर, रुन्नीसैदपुर, डुमरा, भूतही और सोनबरसा सहित कई क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। सड़क चौड़ी होने से इन इलाकों में स्थानीय यातायात और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को फायदा मिल सकता है।

व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

बेहतर सड़क संपर्क का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तर बिहार में कृषि उत्पादों और अन्य सामान की ढुलाई भी अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

परियोजना से जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों और मेगा फूड पार्क को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे माल की आवाजाही, व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

हालांकि, रोजगार और औद्योगिक विकास पर वास्तविक प्रभाव परियोजना के पूरा होने, स्थानीय निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगी राहत

मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी क्षेत्र के धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने में भी इस सड़क की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, बाबा गरीबनाथ मंदिर और पुनौरा धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच में सुधार की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

जमीन अधिग्रहण का काम लगभग पूरा होने का दावा

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। अब निर्माण कार्य की प्रगति और निर्धारित समयसीमा पर नजर रहेगी।

सड़क तैयार होने के बाद मुजफ्फरपुर से सोनबरसा और भारत-नेपाल सीमा की ओर जाने वाले यात्रियों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना के पूरा होने की निश्चित तारीख की पुष्टि आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए।

पटना से नेपाल सीमा तक कितने घंटे में पहुंच सकेंगे?

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि फोरलेन सड़क बनने के बाद पटना से सोनबरसा स्थित भारत-नेपाल सीमा तक कार से पहुंचने में करीब 4 से 5 घंटे लग सकते हैं।

हालांकि, यह अनुमानित यात्रा समय है। वास्तविक समय पटना से प्रस्थान के स्थान, चुने गए मार्ग, ट्रैफिक, सड़क की स्थिति और सीमा पर औपचारिकताओं के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

फिलहाल, इस परियोजना से पटना, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के रास्ते नेपाल सीमा तक सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इसके पूरा होने से यात्रियों के साथ व्यापारिक और मालवाहक वाहनों को भी लाभ मिल सकता है।

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