Sunday, September 27, 2026

22 अक्टूबर से स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने की चेतावनी, JHASA और IMA ने जारी किया आंदोलन का रोडमैप.

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रांची: झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेस एसोसिएशन (JHASA) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की संयुक्त बैठक के बाद राज्य में आंदोलन का ऐलान किया गया है। संगठनों ने कहा है कि यदि उनकी लंबित मांगों पर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो 22 अक्टूबर से सरकारी और निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

चरणबद्ध आंदोलन के जरिए सरकार को दिया जाएगा समय

JHASA और IMA के अनुसार, पूर्ण कार्य बहिष्कार से पहले चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत जागरूकता अभियान, काला बिल्ला लगाकर काम करना और विभिन्न स्तरों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संगठनों का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए सरकार को मांगों पर कार्रवाई का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

IMA के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने की घोषणा

बैठक में शामिल होने रांची पहुंचे IMA के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. धन्वंतरी तिवारी ने बैठक के बाद आंदोलन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन में निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और निजी क्लीनिकों को भी शामिल किया जाएगा। उनके मुताबिक, मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में निजी क्षेत्र में इमरजेंसी सेवाओं के बहिष्कार का भी निर्णय लिया गया है।

डॉ. तिवारी ने कहा कि डॉक्टर कार्य बहिष्कार नहीं करना चाहते, लेकिन लंबे समय से कई मांगें लंबित हैं। इनमें सरकारी डॉक्टरों के लिए DACP लागू करना, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी बनाना और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं।

IMA राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

झारखंड IMA के अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह ने IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजा गया पत्र भी मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि डॉक्टर संगठन सामान्य तौर पर हड़ताल या कार्य बहिष्कार के पक्ष में नहीं रहे हैं, लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

डॉक्टरों की प्रमुख मांगें

डॉक्टर संगठनों ने सरकारी चिकित्सकों के लिए बिहार और केंद्र सरकार की तर्ज पर DACP लागू करने की मांग की है। इसके अलावा मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा 50 बेड तक के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट से बाहर रखने की मांग की गई है।

अन्य मांगों में जूनियर डॉक्टरों को समय पर स्टाइपेंड, मातृत्व अवकाश, संविदा पर चिकित्सकों की संख्या सीमित करना, आयुष्मान भारत योजना के पैकेज रेट में संशोधन, डॉक्टरों को समय पर इंसेंटिव का भुगतान, निजी अस्पतालों के लंबित भुगतान का निपटारा और सिंगल विंडो सिस्टम लागू करना शामिल है।

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. ए.के. सिंह, डॉ. प्रदीप सिंह, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. एस. प्रसाद, डॉ. बिमलेश कुमार सिंह, डॉ. आरके सिंह, डॉ. मृत्युंजय सिंह और डॉ. पंकज समेत IMA और JHASA के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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