गुरु और शुक्र के अस्त होने पर मांगलिक कार्य नहीं होते, इसलिए 11 जून से शुभ कार्यों पर विराम रहेगा. जानिए ज्योतिषाचार्य से…
सनातन धर्म में जब भी कोई शुभ कार्य किया जाता है, जैसे कि विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा.. तो उसके लिए शुभ मुहूर्त देखना आवश्यक होता है. मुहूर्त निर्धारण में ग्रहों की स्थिति, विशेष रूप से गुरु (बृहस्पति) और शुक्र ग्रह की स्थिति का अत्यंत महत्व होता है. ये दोनों ग्रह यदि अस्त या कमजोर अवस्था में हों, तो शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है. जानते हैं
11 जून से गुरु होंगे अस्त: शुभ कार्यों पर लगेगी रोक
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि, इस वर्ष 11 जून 2025 को गुरु ग्रह अस्त (Jupiter Combust) हो रहा है. यह घटना धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गुरु ग्रह का संबंध विवाह, शिक्षा, ज्ञान, धर्म, और मांगलिक कार्यों से है. जब गुरु अस्त होता है, तो इन सभी कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है.
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, गुरु 11 जून से 9 जुलाई 2025 तक अस्त रहेगा. इस अवधि में कोई भी शादी, सगाई, गृह प्रवेश, जनेऊ, यज्ञोपवीत, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा जैसे आयोजन नहीं किए जाएंगे.
6 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ: विष्णु शयन और पूर्ण विराम
गुरु अस्त के दौरान ही 6 जुलाई 2025 को देवशयनी एकादशी है, जिससे चातुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा. चातुर्मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वह समय होता है जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं. यह काल आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी (इस वर्ष 6 जुलाई से 1 नवंबर 2025 तक) तक चलता है.
चातुर्मास के दौरान सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर धार्मिक रूप से पूर्ण विराम लगा दिया जाता है. इस समय को धार्मिक अनुशासन, संयम, उपवास, साधना और तीर्थ यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है. विवाह या मांगलिक कार्य करने पर भगवान की कृपा बाधित मानी जाती है, इसलिए परिवारजन स्वयं से इन्हें टाल देते हैं.
किन कार्यों पर लगेगी रोक?
गुरु अस्त और चातुर्मास के कारण जिन कार्यों पर रोक लगती है, वे हैं:
- विवाह, सगाई
- मुंडन संस्कार
- गृह प्रवेश
- यज्ञोपवीत (जनेऊ)
- मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा
- शिलान्यास या भवन प्रवेश
- नए कार्यों का शुभारंभ
- किन कार्यों की अनुमति है?
हालांकि, सभी कार्य वर्जित नहीं होते. ये कार्य चातुर्मास में किए जा सकते हैं:
- निर्माण कार्य (यदि पहले से चल रहा हो)
- वाहन या गहनों की खरीदारी
- घर की मरम्मत या रेनोवेशन
- तीर्थ यात्रा और पूजा-पाठ
- दान, व्रत, उपवास और धार्मिक अनुष्ठान
विशेषज्ञों की सलाह है कि घर की छत डालने, नींव खोदने या किसी विशेष शुभ आरंभ के लिए पंचांग देखकर ही निर्णय लें.
कब फिर से होंगे शुभ कार्य?
गुरु ग्रह के 9 जुलाई को उदय होने के बाद भी मांगलिक कार्य प्रारंभ नहीं होंगे, क्योंकि तब तक चातुर्मास शुरू हो चुका होगा. अगला प्रमुख शुभ समय आएगा 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी के दिन. इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और एक बार फिर से शुभ कार्यों की शुरुआत की अनुमति मिलती है.


