Wednesday, July 1, 2026

हाई ट्राइग्लिसराइड्स लेवल मानव शरीर के लिए हाई कोलेस्ट्रॉल से भी ज्यादा खतरनाक है, दोनों का दिल की सेहत पर पड़ सकता है बुरा असर…

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पिछले कुछ सालों में दिल की बीमारी की समस्या बहुत बढ़ गई है. दुनिया भर के डॉक्टर दिल की बीमारियों से बचने के लिए रोकथाम को इलाज से बेहतर मानते हैं. रोकथाम के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल, जैसे बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, स्मोकिंग और शराब से बचना, और स्ट्रेस मैनेजमेंट करना महत्वपूर्ण है. आपको बता दें कि कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दो ऐसे फैक्टर्स हैं जिनकी वजह से दिल की बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा होता है.

ये दोनों ही हमारे ब्लड में मौजूद लाभदायक फैट हैं, जिनकी अधिकता से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के बीच अंतर को लेकर कई तरह की शंका पैदा होती है, जिसे हम इस खबर के जरिए स्पष्ट करेंगे. तो आइए दोनों के बीच के अंतर को समझते हैं, ताकि इन्हें कंट्रोल करके दिल से जुड़ी बीमारियों से बचा जा सके…

कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के बीच अंतर समझने से पहले जान लें कि ये दोनों शब्द क्या हैं

कोलेस्ट्रॉल क्या है?
सरल शब्दों में कहें तो कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में मौजूद एक जरूरी और महत्वपूर्ण फैट है, जिसका काम हमारे शरीर में सेल्स और हार्मोन को बनाना है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाना है. यह एक प्रकार का मोम जैसा पदार्थ होता है जो पानी में नहीं घुलता, इसलिए यह हमारे खून में लिपोप्रोटीन नामक प्रोटीन के रूप में मौजूद होता है. जानकारी के लिए बता दें, हमारे शरीर के लिए जरूरी कोलेस्ट्रॉल का प्रोडक्शन लिवर करता है, लेकिन कोलेस्ट्रॉल कुछ फूड आइटम्स , जैसे मांस, हाई फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स और तैलीय भोजन के सेवन से भी शरीर में अवशोषित होता है.

कोलेस्ट्रॉल मुख्य रूप से 2 टाइप के होते हैं

एचडीएल (हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन): इस तरह के कोलेस्ट्रॉल को अच्छा कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है, क्योंकि यह खराब कोलेस्ट्रॉल को तोड़कर शरीर से बाहर निकालने का काम करता है. अगर खून में एचडीएल अधिक होगा, तो हार्ट अटैक का खतरा भी कम होगा.

एलडीएल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन): यह खराब कोलेस्ट्रॉल है और जब यह ब्लड वेसेल्स में मौजूद होता है, तो यह ब्लड फ्लो को ब्लॉक करता है, जिसके कारण दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा लगातार बना रहता है.

कोलेस्ट्रॉल का लेवल कितना होना चाहिए?
हर इंसान में कोलेस्ट्रॉल की जेनरल रेंज अलग-अलग होती है, हालांकि, सभी पैथ लैब एक सामान्य मानक का पालन करते हैं, जो खून टेस्ट के बाद कोलेस्ट्रॉल की सामान्य सीमा की पुष्टि करता है.

  • टोटल कोलेस्ट्रॉल लेवल: 200 mg/dL से कम कोलेस्ट्रॉल का लेवल को नॉर्मल माना जाता है. इसे आदर्श कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कहा जाता है.
  • एचडीएल: 60 mg/dL या उससे ज्यादा का लेवल हार्ट हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. यह good कोलेस्ट्रॉल का लेवल है, जो हार्ट के खतरे को कम करने में मदद करता है.
  • एलडीएल: 100 mg/dL से लो का एलडीएल लेवल हमारे हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है. वहीं, अगर एलडीएल 160 mg/dL से ज्यादा है, तो तुरंत डॉक्टर मदद लें.

ट्राइग्लिसराइड्स क्या है
ट्राइग्लिसराइड्स आपके खून में फैट का एक प्रकार है जो मुख्य रूप से भोजन के द्वारा हमारे शरीर में आता है. ट्राइग्लिसराइड्स हार्ट डिजीज के खतरे को भी बढ़ा सकता है. जब आप कोलेस्ट्रॉल ब्लड टेस्ट करवाते हैं तो आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल के साथ ट्राइग्लिसराइड्स का भी टेस्ट किया जाता है.

जब भी आप अधिक कार्ब्स और शुगर का सेवन करते हैं तो ट्राइग्लिसराइड बनता है. ऐसे में हमारा शरीर उन अतिरिक्त कैलोरी को ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है और उन्हें फैट के रूप में स्टोर कर लेता है, जो शरीर को धीरे-धीरे एनर्जी देता है. जब ये कैलोरी शरीर में अधिक मात्रा में रह जाती है तो ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ने लगता है, जिससे हार्ट रिलेटे समस्याएं पैदा होने लगती हैं.

ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल कितना होना चाहिए?

  • एडल्ट्स में 150 mg/dL से कम ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर सामान्य माना जाता है. यह स्वस्थ ट्राइग्लिसराइड लेवल है. 100 mg/dL से कम ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल आदर्श माना जाता है.
  • वहीं 150 से 199 mg/dL के बीच ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल है तो इसको बॉर्डरलाइन स्तर माना जाता है.
  • 200-499 mg/dL से हाई लेवल को ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल कहा जाता है.
  • 500 mg/dL या उससे अधिक ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को एक इमरजेंसी कंडीशन जैसा माना जाता है

ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल में अंतर
ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल दोनों ही लिपिड (फैट) हैं जो खून में घूमते हैं, लेकिन दोनों ही अलग-अलग कार्य करते हैं. ट्राइग्लिसराइड्स का उपयोग मुख्य रूप से एनर्जी सोर्स के रूप में किया जाता है और शरीर में फैट के रूप में स्टोर किया जाता है. दूसरी ओर, कोलेस्ट्रॉल कोशिका झिल्ली (cell membrane) का एक महत्वपूर्ण घटक है और इसका उपयोग कुछ हार्मोन और विटामिन डी का उत्पादन करने के लिए किया जाता है, मतलब कोलेस्ट्रॉल का कार्य शरीर की कोशिकाओं की दीवारों को रिपेयर करना और कुछ हार्मोन का निर्माण करना है.

दोनों में कौन अधिक हानिकारक
कोलेस्ट्रॉल का हाई लेवल बहुत सारे हार्ट डिजीज के खतरे को बढ़ाता है, वहीं, ट्राइग्लिसराइड्स के हाई लेवल के कारण मोटापा, हार्ट डिजीज, और डायबिटीज की समस्या का रिस्क बढ़ जाता है. इसके साथ ही बता दें, हाई ट्राइग्लिसराइड लेवल के कारण अग्नाशयशोथ(pancreatitis), चयापचय सिंड्रोम और फैटी लीवर रोग का कारण भी बन सकते हैं. ऐसे में देखा जाए तो हाई कोलेस्ट्रॉल से ज्यादा हाई ट्राइग्लिसराइड्स लेवल के कारण अधिक बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है.

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