हजारीबाग: हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के डीएफओ मौन प्रकाश को लेकर विवाद सामने आया है। झामुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष शंभूलाल यादव ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
यादव ने 11 सितंबर 2026 को वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अवर सचिव को लिखित आपत्ति दी है। इसमें उन्होंने डीएफओ के खिलाफ लगाए गए अपने पुराने आरोपों की जांच विभागीय स्तर के बजाय स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग की है।
विभागीय कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
शंभूलाल यादव का दावा है कि उन्होंने 30 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री सचिवालय में डीएफओ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने कथित वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए थे।
उनके अनुसार, बाद में विभाग की ओर से उनसे शपथपत्र और संबंधित साक्ष्य मांगे गए। यादव ने 29 जून 2026 को अपना शपथपत्र विभाग में जमा करने की बात कही है।
यादव का आरोप है कि शिकायत के बाद विभाग की ओर से अलग-अलग पत्र जारी किए गए। शुरुआत में मामले से संबंधित जानकारी और प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा गया, जबकि बाद में 4 अगस्त 2026 के पत्र में पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की बात कही गई।
इसी प्रक्रिया को लेकर उन्होंने विभाग के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
विभागीय पत्रांक 3109 पर भी आपत्ति
शंभूलाल यादव ने विभागीय पत्रांक 3109 को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की है। उनका आरोप है कि इस पत्र के माध्यम से स्वतंत्र जांच के बिना ही मामले को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
यादव ने यह भी आरोप लगाया है कि वन सचिव के निर्देश के आधार पर डीएफओ को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
पार्क निर्माण में अनियमितता का भी आरोप
शंभूलाल यादव ने वन विभाग की ओर से कराए जा रहे पार्क निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया और कथित तौर पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ।
उन्होंने 14 जुलाई और 9 सितंबर को हुए निरीक्षण से संबंधित जिओ-टैग तस्वीरें भी अपने आवेदन के साथ संलग्न करने की बात कही है।
इसके अलावा यादव ने आरोप लगाया है कि योजना से जुड़े मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी नहीं दी गई। उनका यह भी दावा है कि काम पूरी तरह समाप्त होने से पहले ही सरकारी राशि की निकासी कर ली गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अनियमितताओं को छिपाने के लिए बाद में दिखावटी कार्य कराया गया।
उच्चस्तरीय जांच समिति बनाने की मांग
शंभूलाल यादव ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र और वरिष्ठ अधिकारी की अगुवाई में उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि शिकायतकर्ता को अपने सभी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
उनकी मांग है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। साथ ही उन्होंने विभागीय पत्रांक 3109 को निरस्त करने की मांग भी रखी है।
नोट: इस रिपोर्ट में बताए गए वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और निर्माण कार्य से जुड़े आरोप शंभूलाल यादव द्वारा लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
