हजारीबाग: आदिवासी केंद्रीय सरना समिति हजारीबाग की ओर से रविवार को धुमकुड़िया स्थित अखड़ा सरहुल मैदान में करम पूर्व संध्या कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन के दौरान आदिवासी परंपरा, रीति-रिवाज और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना प्रमुखता से दिखाई दी। कार्यक्रम में करम पर्व के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं महापौर अरविंद कुमार राणा, अपर समाहर्ता महेंद्र छोटन उरांव, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शेफाली गुप्ता और डॉ. सोमा उरांव विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहीं।
करम पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
मुख्य अतिथि प्रदीप प्रसाद ने करम पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति का अहम हिस्सा है। उन्होंने प्रकृति, कृषि और पारंपरिक जीवन मूल्यों से जुड़े इस पर्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसे आयोजनों से युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जुड़ते हैं।
महापौर अरविंद कुमार राणा ने भी करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की सराहना करते हुए कहा कि करम पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है।
अपर समाहर्ता महेंद्र छोटन उरांव ने कहा कि करम पर्व आदिवासी समाज के प्रकृति से गहरे जुड़ाव और पारंपरिक जीवनशैली को दर्शाता है। उन्होंने सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
प्रकृति, कृषि और भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा पर्व
करम पर्व झारखंड समेत कई आदिवासी समुदायों का प्रमुख पारंपरिक पर्व है। इसका संबंध प्रकृति, कृषि और भाई-बहन के स्नेह से माना जाता है। करम देवता की पूजा के माध्यम से सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की जाती है।
पर्व के जरिए प्रकृति और कृषि के प्रति सम्मान, पारिवारिक रिश्तों में मजबूती तथा समाज में सहयोग और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया जाता है। करम पूर्व संध्या जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बनते हैं।
आदिवासी केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक ने करम पर्व को आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बताया। वहीं सरना पूजा समिति के अध्यक्ष पवन तिग्गा ने कहा कि यह पर्व समाज में भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का काम करता है।
समिति के सदस्यों ने निभाई अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक, सचिव सुनील लकड़ा, कोषाध्यक्ष महेंद्र कुजूर, रमेश कुमार हेंब्रम, रवि लिंडा, प्रदीप बेदिया, सुनील कच्छप, बिरसा मुंडा, पाहन बंधन टोप्पो, फुलवा कच्छप, विनोद मुंडा, प्रवीण बाखला, मनीषा टोप्पो और संदीप मुंडा समेत कई सदस्यों की भूमिका रही।
समिति के संरक्षक कृपाल कच्छप, सुशील ओड़िया, विशाल लकड़ा और पाहन बंधन एक्का के अलावा अमिका टोप्पो, अमीषा उरांव, ललित सोरेन, शुकरमनी तिर्की, सोनी टोप्पो, रिया कुमारी, शीला मुर्मू, खुशबू टोप्पो, अनिल टुडू, पप्पू एक्का, अंकित टोप्पो और समीर एक्का ने भी आयोजन में सहयोग किया।
