Thursday, June 11, 2026

सोशल स्मोकिंग या अल्कोहल सेवन छिपाकर हेल्थ इंश्योरेंस लेना पड़ सकता है भारी; तथ्य छिपाने के कारण कंपनी रिजेक्ट कर सकती है क्लेम….

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आजकल के सोशल कल्चर में ‘सोशल स्मोकिंग’ एक आम बात बन चुकी है. अक्सर लोग इसे नियमित आदत नहीं मानते और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय इस जानकारी को छुपा जाते हैं. उपभोक्ताओं को लगता है कि चूंकि वे रोज सिगरेट नहीं पीते, इसलिए वे ‘नॉन-स्मोकर’ हैं. हालांकि, बीमा विशेषज्ञों के अनुसार, यह छोटी सी चूक भविष्य में बड़े वित्तीय संकट का कारण बन सकती है और आपके क्लेम को पूरी तरह से खारिज करा सकती है.

इंश्योरेंस का मूल सिद्धांत और जोखिम का आकलन
बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि संपूर्ण इंश्योरेंस इंडस्ट्री ‘परम सद्भाव’ के कानूनी सिद्धांत पर काम करती है. इसका सीधा मतलब यह है कि पॉलिसीधारक को अपने स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात का बिल्कुल सटीक विवरण देना होता है. जब कोई कंपनी किसी व्यक्ति का बीमा करती है, तो वह उसके स्वास्थ्य जोखिम का मूल्यांकन करती है.

धूम्रपान, चाहे वह दैनिक हो या कभी-कभार, शरीर पर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है. तंबाकू और निकोटीन का सेवन सीधे तौर पर हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, स्ट्रोक और कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हुआ है. बीमा कंपनियों के पास ‘कम स्मोकिंग’ या ‘ज्यादा स्मोकिंग’ के लिए कोई अलग मापदंड नहीं होते; उनके लिए निकोटीन का सेवन ही जोखिम की श्रेणी तय करता है. यदि कोई आवेदक स्मोकिंग की बात स्वीकार करता है, तो कंपनी जोखिम के अनुसार प्रीमियम में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी करती है, लेकिन भविष्य के क्लेम को सुरक्षित कर देती है.

क्लेम रिजेक्शन के आधुनिक तरीके: सोशल मीडिया और मेडिकल रिकॉर्ड्स
डिजिटल युग में बीमा कंपनियों ने क्लेम की जांच के तरीकों को बेहद आधुनिक और सख्त बना दिया है. यदि किसी पॉलिसीधारक ने आवेदन के समय खुद को नॉन-स्मोकर बताया है, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के दौरान डॉक्टरों की केस हिस्ट्री में ‘ओकेशनल स्मोकर’ दर्ज हो जाता है, तो कंपनी बिना किसी देरी के क्लेम को ‘मटीरियल नॉन-डिस्क्लोजर’ के आधार पर रद्द कर देती है.

इसके अलावा, आजकल बीमा कंपनियां दावों के निपटान के दौरान बड़े पैमाने पर फॉरेंसिक और डिजिटल जांच का सहारा लेती हैं. यदि जांच के दौरान पॉलिसीधारक के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर धूम्रपान या शराब के सेवन से जुड़ी तस्वीरें मिलती हैं, तो कंपनियां इसे पुख्ता सबूत मानती हैं. इसी तरह, यदि किसी कर्मचारी ने कार्यालय से छुट्टी लेने के लिए किसी पुरानी मेडिकल रिपोर्ट का उपयोग किया था और उसमें किसी पुरानी बीमारी या आदत का जिक्र था, तो बीमा कंपनियां उन दस्तावेजों को भी कानूनी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं.

सुरक्षित क्लेम के लिए विशेषज्ञों की व्यावहारिक सलाह
स्वयं भरें प्रस्ताव पत्र: कभी भी एजेंट के भरोसे फॉर्म न छोड़ें. एजेंट अक्सर प्रीमियम कम रखने के लिए आदतों वाले कॉलम में ‘No’ टिक कर देते हैं, जिसका नुकसान बाद में परिवार को उठाना पड़ता है.

पूरी पारदर्शिता बरतें: सिगरेट के अलावा यदि आप वेप (E-Cigarette), हुक्का, निकोटीन पैच, गुटका या शराब का सेवन कभी-कभार भी करते हैं, तो फॉर्म में स्पष्ट रूप से ‘Yes’ का विकल्प चुनें.

पुरानी बीमारियों का विवरण: यदि भूतकाल में कोई सर्जरी या बड़ी बीमारी का रिकॉर्ड रहा हो, तो उसके सभी दस्तावेज जमा करें.

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