Semiconductor Investment in India: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने की कोशिशों के बीच वैश्विक कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है। दिल्ली में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित SEMICON India 2026 में दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों ने भारत में कारोबार, विनिर्माण, अनुसंधान और आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार करने की योजनाएं सामने रखीं। आयोजन में 51,656 पंजीकरण हुए, करीब 40 हजार लोगों की मौजूदगी रही और 600 से ज्यादा प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया। इनमें लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां थीं।
ASML ने भारत में खोला कार्यालय
सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लिथोग्राफी उपकरण बनाने वाली कंपनी ASML ने भारत में अपना कार्यालय स्थापित किया है। कंपनी की ओर से भारत में आगे और सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयां स्थापित होने की संभावना जताई गई है।
ASML के मुख्य रणनीतिक सोर्सिंग एवं खरीद अधिकारी एलन वेन के अनुसार, भारत में बड़े पैमाने पर चिप निर्माण का इकोसिस्टम तैयार करने के लिए एक से अधिक फैब की जरूरत होगी। उन्होंने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के 300 मिलीमीटर सेमीकंडक्टर फैब का भी उल्लेख किया, जिसकी प्रस्तावित क्षमता 50 हजार वेफर प्रति माह बताई गई है।
Applied Materials और Lam Research की बड़ी योजनाएं
सेमीकंडक्टर उपकरण क्षेत्र की कंपनी Applied Materials ने अगले 10 वर्षों में भारत में करीब 5 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी ने इससे पहले कर्नाटक सरकार के साथ चिप निर्माण उपकरणों के अनुसंधान, विकास और उत्पादन से जुड़े करीब 3,600 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता भी किया था।
वहीं, Lam Research ने भारत में सिलिकॉन कलपुर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है।
इन निवेश योजनाओं से सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ-साथ उपकरण, सामग्री, अनुसंधान और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों के विस्तार की संभावना है।
सेमीकॉन 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के अगले चरण के लिए Semicon 2.0 को मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय 1,27,500 करोड़ रुपये है। इसके तहत चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मशीन और सामग्री, नए फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया है।
सरकार का लक्ष्य भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को केवल चिप निर्माण तक सीमित रखने के बजाय डिजाइन से लेकर पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री और रिसर्च तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने किए 16 समझौते
SEMICON India 2026 के दौरान कुल 56 एमओयू, घोषणाएं और रणनीतिक पहल सामने आईं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने गुजरात के धोलेरा में प्रस्तावित चिप निर्माण इकाई और असम में चिप असेंबली एवं टेस्टिंग सुविधा के लिए सप्लायर कंपनियों के साथ 16 समझौते किए।
धोलेरा में कंपनी करीब 363 एकड़ में एक औद्योगिक पार्क भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य चिप निर्माण संयंत्र से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला को एक ही इकोसिस्टम में विकसित करना है।
भारतीय चिप-डिजाइन कंपनियों के लिए भी बढ़ रहे अवसर
SEMICON India 2026 में भारतीय चिप-डिजाइन कंपनियों और स्टार्टअप्स ने भी अपनी योजनाएं पेश कीं। L&T Semiconductor Technologies, Indisemi, Exiro और Ahisa Digital Innovations समेत कई कंपनियों ने व्यावसायिक स्तर पर चिप उत्पादन और कारोबार का विस्तार करने की योजनाएं बताईं।
सरकार ने अगले चरण में भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 कंपनियों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 का फोकस भारत में डिजाइन क्षमता के साथ-साथ उत्पादन और संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर है।
भारत में बढ़ रहा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग बेस
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें कुल निवेश प्रतिबद्धता 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से पांच इकाइयों ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
इस पूरे इकोसिस्टम के विस्तार से भारत में चिप निर्माण के साथ उपकरण, पैकेजिंग, डिजाइन, अनुसंधान, कौशल विकास और सप्लाई चेन से जुड़े कारोबार के लिए भी नई संभावनाएं बन रही हैं।
2032 तक घरेलू उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
भारत सेमीकंडक्टर की घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा देश में ही तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए आने वाले वर्षों में और फैब तथा पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है।
SEMICON India 2026 के आयोजन ने इस क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों, भारतीय उद्योग, स्टार्टअप्स और सरकार के बीच सहयोग के लिए एक बड़ा मंच उपलब्ध कराया। तीन दिनों के आयोजन में 52 देशों की भागीदारी और 56 एमओयू एवं रणनीतिक घोषणाएं इस क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को दर्शाती हैं।
