Wednesday, July 8, 2026

सेबी ने विदेशी निवेशकों (FPI) की रजिस्ट्रेशन फीस डॉलर के बजाय रुपये में तय की.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर, सेबी (SEBI) ने विदेशी निवेशकों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है. सेबी ने नियमों में संशोधन करते हुए अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (FVCI) के लिए रजिस्ट्रेशन फीस को अमेरिकी डॉलर (USD) के बजाय भारतीय रुपये (INR) में तय कर दिया है. यह नया नियम अगले 6 महीने के बाद लागू हो जाएगा, ताकि विदेशी निवेशकों और उनके एजेंटों को इस नई व्यवस्था में ढलने के लिए पूरा समय मिल सके.

फीस में क्या बदलाव हुए हैं?

  • नए नियमों के अनुसार, अब डॉलर के मुकाबले रुपये की फीस तय कर दी गई है.
  • पहले कंटिन्यूएशन (निरंतरता) फीस 1,000 डॉलर थी, जिसे अब बदलकर 90,000 रुपये कर दिया गया है.
  • इसी तरह, कैटेगरी-1 FPI और FVCI के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 2,500 डॉलर से बदलकर 2.3 लाख रुपये कर दी गई है. इसके अलावा सेबी ने लेट फीस में भी इसी तरह का बदलाव किया है.
  • क्या है नई प्रक्रिया?
    इस नए नियम के तहत, ‘डेजिग्नेटेड डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स’ (DDP) की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी. वे विदेशी निवेशकों से यह फीस इकट्ठा करेंगे और विदेशी निवेशक को रजिस्ट्रेशन देने के 5 कार्य दिवसों के भीतर इस रकम को सेबी के पास जमा कराएंगे. इसके साथ ही, सेबी ने कस्टोडियनों के लिए भी फीस का नियम बदला है. अब उन्हें सालाना 10 लाख रुपये के बजाय हर महीने 85,000 रुपये की फीस देनी होगी.
  • इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
    अभी तक डॉलर में फीस आने की वजह से सेबी को कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. डॉलर को रुपये में बदलते समय बैंक चार्ज और एक्सचेंज रेट की वजह से सटीक हिसाब लगाने में मुश्किल होती थी. सेबी को सारा हिसाब-किताब मैन्युअल (हाथ से) करना पड़ता था, जिससे वित्तीय रिपोर्टिंग में देरी होती थी. अब रुपये में फीस आने से सेबी को तुरंत और सटीक हिसाब-किताब देखने को मिलेगा. आंकड़ों के अनुसार, सेबी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान विदेशी निवेशकों से जीएसटी समेत 12.98 मिलियन डॉलर की कमाई की थी.

पैन बनवाना भी हुआ आसान
फीस के अलावा, सेबी ने विदेशी निवेशकों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भी आसान बना दिया है. अब इस फॉर्म में निवेशक की जन्मतिथि या कंपनी के रजिस्ट्रेशन की तारीख लिखना जरूरी होगा. यह बदलाव केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नियमों के अनुसार किया गया है, जिससे विदेशी निवेशकों को भारत में टैक्स भरने के लिए जरूरी पैन कार्ड बहुत आसानी और तेजी से मिल सकेगा. इस कदम से भारत में विदेशी निवेश (FPI) के आने की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी.

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