Saturday, October 24, 2026

सिल्ली-सोनाहातू के तीन बालू घाटों पर खनन की तैयारी का आरोप, वन विभाग की मंजूरी पर सवाल.

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रांची | 24 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

झारखंड के रांची जिले के सिल्ली-सोनाहातू क्षेत्र में बालू खनन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रोक हटने के बाद कांची नदी के तीन बालू घाटों से खनन की तैयारी किए जाने की चर्चा है। हालांकि, वन विभाग की आपत्तियों के अनुसार इन घाटों पर वन संबंधी मंजूरी नहीं मिलने के कारण खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती।

विवाद का केंद्र एडरमहातु, सोमाडीह और डिबाडीह बालू घाट हैं। आरोप है कि इन घाटों से बालू निकालने के बाद दूसरे घाट के चालान के जरिए बाजार में उसकी बिक्री की जा सकती है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।

कांची नदी के किनारे स्थित हैं तीनों बालू घाट

सिल्ली-सोनाहातू क्षेत्र के जिन तीन बालू घाटों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वे कांची नदी में स्थित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र के अन्य घाटों की तुलना में इन तीन स्थानों पर बालू की उपलब्धता अधिक बताई जाती है। इसी वजह से इन घाटों को लेकर कारोबारी गतिविधियों की चर्चा हो रही है।

तीनों घाटों के नाम इस प्रकार हैं:

  • एडरमहातु बालू घाट
  • सोमाडीह बालू घाट
  • डिबाडीह बालू घाट

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि NGT की रोक हटने के बाद इन घाटों से बालू खनन की तैयारी की जा रही है। हालांकि, खनन शुरू करने के लिए आवश्यक सभी अनुमतियां प्राप्त हुई हैं या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित विभागों से किया जाना जरूरी है।

वन विभाग ने क्यों जताई आपत्ति?

रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग ने इन तीनों बालू घाटों पर खनन को लेकर पहले आपत्ति जताई थी। विभाग का कहना बताया गया है कि ये क्षेत्र जंगली हाथियों के आने-जाने के महत्वपूर्ण रास्ते हैं। साथ ही, इन्हें जलग्रहण क्षेत्र से जुड़ा बताया गया है।

ऐसे क्षेत्रों में खनन की अनुमति देने से पहले वन और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन तथा आवश्यक स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। यदि संबंधित घाटों को वन विभाग की मंजूरी नहीं मिली है, तो खनन की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।

इस मामले में वन विभाग की वर्तमान लिखित स्थिति और संबंधित खनन प्राधिकारियों के रिकॉर्ड की पुष्टि आवश्यक है।

2015-16 से 2017-18 के बीच हुआ था ऑक्शन

रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों बालू घाटों का वर्ष 2015-16 से 2017-18 की अवधि के लिए ऑक्शन किया गया था। राजस्थान के संदीप चांडक ने कथित तौर पर यह नीलामी हासिल की थी। उस समय वन विभाग ने खनन को लेकर आपत्ति जताई थी।

बताया गया है कि वन विभाग की आपत्ति के बाद 24 जनवरी 2018 को रांची के तत्कालीन उपायुक्त ने खनन विभाग को पत्र लिखकर इन घाटों से खनन नहीं किए जाने की बात स्पष्ट की थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि नीलामी की राशि का 40 प्रतिशत संदीप चांडक को लौटाने का निर्देश दिया गया था।

इस पुराने पत्र और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की उपलब्धता से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि उस समय प्रशासन ने क्या निर्णय लिया था और वर्तमान में उन निर्देशों की क्या स्थिति है।

दूसरे घाट के चालान से बालू बेचने की आशंका

इस मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि तीनों घाटों से बालू निकालकर किसी दूसरे वैध घाट के चालान का इस्तेमाल करते हुए बाजार में बेचा जा सकता है। ऐसा होने पर बालू के वास्तविक स्रोत और परिवहन दस्तावेजों के बीच अंतर पैदा हो सकता है।

हालांकि, फिलहाल यह एक आरोप या आशंका है। उपलब्ध रिपोर्ट में इस तरह की बिक्री के किसी प्रमाणित मामले, जब्ती या आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस दावे की पुष्टि के लिए खनन विभाग, परिवहन दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की जांच रिपोर्ट जरूरी होगी।

खनन विभाग और प्रशासन की भूमिका अहम

सिल्ली-सोनाहातू के इन बालू घाटों से जुड़ा विवाद पर्यावरणीय संरक्षण, वन्यजीवों के आवागमन और खनन नियमों के पालन से संबंधित है। ऐसे में वन विभाग, जिला प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि तीनों घाटों के लिए वर्तमान में कोई वैध खनन अनुमति जारी की गई है या नहीं। साथ ही, NGT के आदेश की वास्तविक स्थिति, वन विभाग की आपत्ति और वर्ष 2018 के प्रशासनिक पत्र के आधार पर आगे की कार्रवाई क्या हुई, इसकी भी पुष्टि की जानी चाहिए।

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