Saturday, October 24, 2026

हथियार बरामदगी मामले में अखिलेश सिंह को हाईकोर्ट से राहत, सरकार की अपील खारिज.

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रांची/जमशेदपुर | BHARATSUPERFASTNEWS

झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के अखिलेश सिंह को आर्म्स एक्ट के एक मामले में बड़ी कानूनी राहत दी है। अदालत ने उन्हें बरी करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति साबित नहीं हुई और जिस परिसर से हथियार बरामद किए जाने का दावा किया गया, उस पर भी अखिलेश सिंह का नियंत्रण स्थापित नहीं हो सका था।

यह मामला जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना कांड संख्या 86/2004 से जुड़ा है। निचली अदालत ने 12 अगस्त 2021 को साक्ष्यों के अभाव में अखिलेश सिंह को आरोपों से बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की सरकार की अपील?

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और निचली अदालत के फैसले की समीक्षा की। अदालत के अनुसार, अखिलेश सिंह की कथित स्वीकारोक्ति को कानूनी रूप से साबित नहीं किया जा सका था। इसके अलावा, हथियार जिस परिसर से बरामद किए जाने की बात कही गई, उस पर आरोपी का नियंत्रण भी प्रमाणित नहीं हुआ।

इन परिस्थितियों में हथियार की बरामदगी को आरोपी के खिलाफ विश्वसनीय साक्ष्य मानने का पर्याप्त आधार नहीं मिला। इसी आधार पर अदालत ने राज्य सरकार की अपील में कोई मेरिट नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया।

2004 में क्वार्टर से हथियार बरामद होने का दावा

प्राथमिकी के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2004 की रात पुलिस ने एक कथित स्वीकारोक्ति के आधार पर सिदगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित क्वार्टर नंबर 59 में छापेमारी की थी। बताया गया कि अखिलेश सिंह ने पुलिस को नौ एमएम की पिस्टल और कारतूस छिपाकर रखे जाने की जानकारी दी थी।

पुलिस का दावा था कि क्वार्टर का ताला तोड़कर तलाशी लेने पर बेडरूम की एक रैक से प्लास्टिक में लिपटी नौ एमएम की पिस्टल मिली। पिस्टल की मैगजीन में 12 कारतूस होने की बात कही गई थी। पुलिस ने हथियार और कारतूस जब्त कर जब्ती सूची तैयार की थी।

इसी बरामदगी के आधार पर सिदगोड़ा थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, अदालत में आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति और संबंधित परिसर पर उसके नियंत्रण को लेकर अभियोजन पक्ष अपना पक्ष निर्णायक रूप से साबित नहीं कर सका।

सुनवाई के दौरान पांच पुलिसकर्मियों ने दी गवाही

मामले की सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए थे। सभी पुलिसकर्मी छापेमारी दल के सदस्य थे। उन्होंने तलाशी और हथियार बरामदगी से संबंधित घटनाक्रम के बारे में गवाही दी थी।

अभियोजन पक्ष ने जब्ती सूची, प्राथमिकी, जांच रिपोर्ट, स्वीकृति रिपोर्ट और कथित स्वीकारोक्ति के एक हिस्से समेत अन्य दस्तावेज भी अदालत में पेश किए थे।

राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई थी कि आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति के आधार पर हथियार और कारतूस बरामद किए गए थे तथा बंद परिसर से बरामदगी के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध थे। लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद इन दलीलों को अपील स्वीकार करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।

निचली अदालत का बरी करने का फैसला बरकरार

जमशेदपुर के 12वें अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 12 अगस्त 2021 को अखिलेश सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था।

हाईकोर्ट ने अपील में कोई ठोस आधार नहीं पाते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही विलंब माफी से संबंधित आवेदन भी खारिज कर दिया गया। इस फैसले के बाद निचली अदालत द्वारा अखिलेश सिंह को बरी किए जाने का आदेश बरकरार रहा।

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